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सैफई में छात्रों के साथ हुई रैगिंग की घटना में सात सीनियर सस्पेंड

शुरुआती जांच में प्रथम वर्ष के छात्रों ने पहले बताया कि उनके साथ किसी भी प्रकार की रैगिंग नही हुई है. हालांकि बाद में एंटी रैगिंग समिति के माध्यम से कराई गई जांच में प्रथम वर्ष के छात्रों नें स्वीकार किया कि उनके साथ रैगिंग हुई है और दोषी सीनियर छात्रों के नाम भी बताए.

रैगिंग से प्रताड़ित छात्र (फाइल फोटो) रैगिंग से प्रताड़ित छात्र (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के सैफई मेडिकल कॉलेज में छात्रों के साथ हुई रैगिंग की जांच में नई जानकारियां निकल कर आई है. रैगिंग की घटना सामने आने के बाद पूरे कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने एक जांच समिति का गठन किया और स्थानीय पुलिस को भी इस जांच से जोड़ा गया.

शुरुआती जांच पड़ताल के दौरान प्रथम वर्ष के छात्रों ने पहले बताया कि उनके साथ किसी भी प्रकार की रैगिंग नही हुई है. लेकिन बाद में एंटी रैगिंग समिति के माध्यम से कराई गई जांच में प्रथम वर्ष के छात्रों ने स्वीकार किया कि उनके साथ रैगिंग हुई है और दोषी सीनियर छात्रों के नाम भी बताए.

एंटी रैगिंग समिति ने अपनी जांच में सात सीनियर छात्रों को रैगिंग का दोषी पाया था. साथ ही दोषी छात्रों पर 25000 रुपए का आर्थिक दंड और 3 महीने के लिए कॉलेज के छात्रावास एवं कक्षा में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके साथ कॉलेज प्रशासन ने सभी सात सीनियर छात्रों के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है. कॉलेज प्रशासन का ये भी मानना है कि ये रैगिंग की घटना को सामूहिक तौर पर अंजाम दिया गया है. इसलिए एमबीबीएस बैच 2018 के समस्त छात्र छात्राओं पर प्रति छात्र ₹5000 का अर्थदंड भी लगाया गया है. साथ ही कॉलेज छात्रावास के अधीक्षकों को उनके दायित्व से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.

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