उन्नाव के डौंडियाखेड़ा में खजाना दबा होने का शोभन सरकार का सपना आखिरकार सच नहीं हुआ. लेकिन फिरोजाबाद में एक जैन मुनि का कुछ ऐसा ही सपना सच साबित हो गया. गुरुवार 28 नवंबर को फिरोजाबाद में यमुना किनारे स्थित चंद्रवाड़ के जैन मंदिर में भगवान के अभिषेक के लिए आए जैन मुनि अमित सागर महाराज ने 27 नवंबर की रात सपने में मंदिर की परिधि में प्रतिमा दबी होने का सपना देखा, जिसे अगले दिन खुदाई के बाद ढूंढ लिया गया.
मिली जानकारी के अनुसार जैन मुनि बुधवार शाम यहां पहुंचे थे. सुबह अभिषेक के बाद जैन मुनि ने मंदिर के पुजारी और अनुयाइयों को बताया कि उन्होंने रात सपने में देखा कि दो सौ मीटर की परिधि में मां सरस्वती की प्रतिमा दबी है. इसके बाद मेला कमेटी के पदाधिकारीगण योगेंद्र प्रकाश जैन, नीतेश अग्रवाल ने जैन मुनि से खुदाई शुरू कराने का अनुरोध किया. भक्तों का काफिला मंदिर से थोड़ी दूर स्थित बीहड़ की तरफ चल निकला. एक कुत्ता भी इस दौरान आगे चलने लगा. उसने जहां सूंघा वहीं जैन मुनि ने खुदाई को कहा. तीन-चार स्थानों पर यह प्रक्रिया चली. थोड़ी-थोड़ी खुदाई पर ही मुनि अमित सागर को आभास हो गया कि प्रतिमा यहां नहीं है. लिहाजा, खुदाई बंद करा दी गई.
पहले मिले टूटे बर्तन, पत्थर और मटके, लेकिन फिर...
इसके बाद मुनि कुछ और आगे बढ़े. वहां भी कुत्ते ने सूंघा, तो टीले पर मजदूरों को खुदाई का संकेत दिया. थोड़ी सी खुदाई होते ही उसमें प्राचीनकाल के टूटे बर्तन और कलात्मक पत्थर निकले. इस पर मजदूरों को संभल कर खुदाई करने की नसीहत दी गई. थोड़ा और खोदने पर तीन मटके निकले, उनमें से एक टूट गया. मटके निकालने के बाद लोगों के चेहरे खुशी और उत्साह से खिल उठे. एक घंटे चले प्रयास और छह फुट गहरी खुदाई के बाद जयकारों के शोर के बीच गड्ढे से काले रंग की लगभग डेढ़ फुट ऊंची और एक फुट चौड़ी प्रतिमा निकली. प्रतिमा और अन्य सामान को चंद्रवाड़ जैन मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया.
जैन मुनि अमित सागर महाराज के मुताबिक यह प्रतिमा करीब एक हजार वर्ष पुरानी है. खुदाई से निकली प्रतिमा एक ही पत्थर की बनी हुई है, लेकिन उसमें 15 र्तीथकर भगवान की छोटी-छोटी मूर्तियां हैं. काले रंग की प्रतिमा कसौटी (सोने की पहचान करने वाला पत्थर) की है, जो काफी कीमती होता है.