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राम मंदिर आंदोलन के वो बड़े चेहरे जो नहीं बन पाएंगे भूमिपूजन के पलों के गवाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर निर्माण का काम रफ्तार पकड़ लेगा. अस्सी के दशक के आखिर में और नब्बे की दशक के शुरू में जो कई बड़े चेहरे राम मंदिर आंदोलन की पहचान माने जाते थे, वे बुधवार को अयोध्या के आयोजन में नजर नहीं आएंगे.

चीफ आर्किटेक्ट सोमपुरा ने तैयार किया राम मंदिर का नक्शा (फोटो- Aajtak) चीफ आर्किटेक्ट सोमपुरा ने तैयार किया राम मंदिर का नक्शा (फोटो- Aajtak)

  • 5 अगस्त को राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के शिलापूजन के लिए अयोध्या तैयार है
  • मुरली मनोहर जोशी और लाल कृष्ण आडवाणी साक्षात अयोध्या में उपस्थित नहीं होंगे

राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन में कुछ ही घंटे अब बचे हैं. 80 के दशक में शुरू हुए राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की परिणति अब भव्य राम मंदिर निर्माण के मूर्त रूप में होने जा रही है. इस दौरान बीते करीब चार दशकों में सरयू में काफी पानी बह चुका है.

राम मंदिर का निर्माण जैसे जैसे आगे बढ़ेगा, अयोध्या भी अगले कुछ वर्षों में काफी बदल जाएगी. विकास के कई प्रोजेक्ट्स पर पहले से ही काम चल रहा है, कुछ और शुरू होंगे. कोशिश यही होगी कि अयोध्या बड़े तीर्थस्थलों के तौर पर दुनिया के नक्शे में आ जाए.

5 अगस्त को राम जन्मभूमि पर विशाल मंदिर के शिलापूजन के लिए अयोध्या तैयार है. हर तरफ पीला रंग छाया हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर निर्माण का काम रफ्तार पकड़ लेगा.

हालांकि अस्सी के दशक के आखिर में और नब्बे की दशक के शुरू में जो कई बड़े चेहरे राम मंदिर आंदोलन की पहचान माने जाते थे, वे बुधवार को अयोध्या के आयोजन में नजर नहीं आएंगे.

लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी

राम मंदिर आंदोलन के वक्त सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकालने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और उस दौर में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे मुरली मनोहर जोशी 5 अगस्त को साक्षात अयोध्या में मौजूद होकर उन लम्हों के गवाह नहीं बन पाएंगे, जिन्हें देखने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया.

राम मंदिर के निर्माण की जिम्मेदारी जिस राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर है, उसकी तरफ से स्पष्ट किया गया है कि आडवाणी और जोशी ने ट्रस्ट को सूचित किया है कि वे दोनों इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाएंगे. इसके लिए दोनों ने अपनी अधिक उम्र का हवाला दिया है. ट्रस्ट के मुताबिक देश दुनिया में कोरोनावायरस संक्रमण फैले होने की वजह से दोनों वरिष्ठ नेताओं ने ये फैसला किया. आडवाणी की उम्र 92 साल और जोशी की 86 साल है. कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल में अधिक उम्र के लोगों को घरों में रहने की ही हिदायत है.

capture_080420085729.jpgलाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी

कल्याण सिंह

ऐसा ही कुछ कल्याण सिंह के साथ भी है. नब्बे के दशक के शुरुआती दो उथल-पुथल वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की कमान बतौर मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पास ही थी. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी विध्वंस की घटना के वक्त कल्याण सिंह ही मुख्यमंत्री थे. कल्याण सिंह अब 88 साल के हैं.

कल्याण सिंह पिछले दिनों किसी कोरोना पॉजिटिव शख्स के संपर्क में आए थे. इसलिए उन्होंने दो दिन पहले से खुद को होम क्वारनटीन कर रखा है.

111_080420085905.jpgकल्याण सिंह

उमा भारती

नब्बे के दशक के शुरुआती दौर में राम मंदिर आंदोलन में जो युवा चेहरा सबसे चर्चित रहा, वो उमा भारती का था. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी विध्वंस के दौरान उमा भारती की एक तस्वीर बहुत चर्चित रही. इस तस्वीर में वो मुरली मनोहर जोशी के कंधे पर चढ़ी दिखाई दी थीं.

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मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती अब 61 वर्ष की हैं. उमा भारती मंगलवार शाम को अयोध्या पहुंच गईं. उमा भारती ने स्पष्ट किया है कि वे सरयू तट पर एकांतवास में रहेंगी.

इस संबंध में उन्होंने सोमवार को तीन ट्वीट किए. सोमवार को अपने आखिरी ट्वीट में उमा भारती ने कहा था कि वो शिलान्यास वाले मुहूर्त पर शिलान्यास वाले स्थान से बहुत दूर उसी समय सरयू के किनारे मौजूद रहेंगी. उमा भारती ने सोमवार को इससे पहले दो ट्वीट के जरिए अपनी मन की बात रखी थी.

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विनय कटियार

राम मंदिर आंदोलन की मुखर आवाज माने जाने वाले बीजेपी नेता और बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष विनय कटियार अयोध्या में मौजूद हैं. लेकिन उन्होंने मंगलवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सूचित किया कि उनकी तबीयत ख़राब है. पिछले कई दिनों से उन्हें कमर में दर्द है, जिस वजह से वो चलने में दिक़्क़त महसूस कर रहे हैं. विनय कटियार अब 65 वर्ष के हैं.

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राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे कुछ बड़े चेहरे अब इस दुनिया में नहीं हैं. जैसे कि आंदोलन संचालक और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल, राम जन्मभूमि न्यास के पूर्व अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास और संत देवरहा बाबा.

अशोक सिंघल के भतीजे सलिल सिंघल बुधवार को भूमि पूजन में मुख्य यजमान होंगे. बुधवार को अयोध्या के कार्यक्रम में मुख्य मंच पर मुख्य मंच पर पीएम नरेंद्र मोदी, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास मौजूद रहेंगे.

इन तस्वीरों में देखें कितना भव्य होगा अयोध्या का राम मंदिर

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे कई बड़े नेता हालांकि 5 अगस्त के मुख्य कार्यक्रम से दूर रहने को लेकर अपनी स्थिति खुद ही स्पष्ट कर चुके हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति सुर्खियों में जरूर है. जैसे विनय कटियार और उमा भारती का अयोध्या में मौजूद रहते हुए भी मुख्य कार्यक्रम से दूर रहना.

कोरोना की वजह से आमंत्रित लोगों की सूची में कटौती की गई है. पहले आमंत्रित सूची में 220 के करीब लोग थे, जिनकी संख्या अब 175 तक रखी गई है.

जो मुस्लिम चेहरे रहेंगे मौजूद

अयोध्या की पहचान गंगा जमुनी तहजीब की भी है. इसी का सबूत है कि मुख्य कार्यक्रम के गवाह कुछ मुस्लिम चेहरे भी बनेंगे. कार्यक्रम के लिए मुकदमे में बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी, लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ और सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी. सूत्रों की मानें तो मोहम्मद शरीफ अस्वस्थ होने के कारण इस भूमि पूजन के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे.

ज़ुफर फारूकी के कार्यक्रम में मौजूद रहने की संभावना है. इकबाल अंसारी ने कहा है कि उन्हें न्योता मिलना राम की मर्जी है. अंसारी ने कहा है कि अगर उनकी बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात होती है तो वो उन्हें रामचरित मानस और रामनामी दुपट्टा भेंट देंगे.

iqbal-ansari_080420090258.jpgइकबाल अंसारी

mohd-sharief-with-tricolour_080420090333.jpgमोहम्मद शरीफ

समय का रंग देखिए कि जो राम मंदिर के बनाए जाने के कभी विरोधी रहे वो भूमि पूजन के साक्षी होंगे. और जो राम मंदिर आंदोलन के कभी मुख्य चेहरा रहे वो दूर से ही भूमि पूजन के ऐतिहासिक पलों को देखेंगे.

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