बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की यूपी में रैलियां शुरू होने से पहले विवाद शुरू हो गए हैं. बीजेपी ने 15 अक्टूबर को कानपुर में नरेंद्र मोदी की पहली रैली करवाने की घोषणा की तो अखिलेश सरकार की त्यौरियां चढ़ गईं. सरकार रैली पर प्रतिबंध लगाने के मूड में आ गई.
सरकार का तर्क है कि बकरीद के त्योहार के दिन मोदी को रैली करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. इसके बाद बीजेपी नेता मोदी की रैली के लिए 19 या 20 अक्टूबर का दिन मुकर्रर कर रहे हैं और अब रेलवे ने 'ब्रेक' लगा दिया है. असल में कानपुर में भारी भीड़ वाली रैली के लिए कोई बड़ा मैदान न होने के कारण गोविंद नगर में पराग डेयरी के पास मौजूद रेलवे ग्राउंड के लिए आवेदन किया गया था.
कानपुर बीजेपी के अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी के पास रेल मंत्रालय से 26 सितंबर को एक पत्र आया है, जिसमें रेलवे ग्राउंड को राजनीतिक उपायोग में न देने की बात कही गई है. मैथानी आरोप लगाते हैं, रेलवे ग्राउंड लेने के लिए जब मैंने रेल मंत्रालय के अफसरों से बात की थी तो उन्होंने कहा था कि निर्धारित फीस जमा करने के बाद ग्राउंड दे दिया जाएगा. अब अचानक परमिशन न देने के पीछे केंद्र सरकार की साजिश है.
प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक सवाल उठाते हैं कि कांग्रेसी नेता रेलवे ग्राउंड में रैली और सभा कर सकते हैं तो बीजेपी नेता क्यों नहीं? 2009 के लोकसभा और 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान कई जगहों पर कांग्रेसी नेताओं ने रेलवे के मैदानों पर सभाएं की थीं. पाठक ने आरोप लगाया, 'केंद्र और राज्य की सपा सरकार एक साजिश के तहत यूपी में नरेंद्र मोदी की रैली रोकने के उपाय तलाश रही हैं. इससे यह साफ जाहिर होता है कि ये सरकारें मोदी से कितना भयभीत हैं.'
उधर समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि प्रदेश सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे किसी भी इलाके में रैली के चलते तनाव की स्थिति पैदा हो जाए.