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निठारी कांड: सुरेंद्र कोली की फांसी पर 23 दिसंबर तक रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी हत्याकांड के मुख्य मुजरिम सुरेंद्र कोली की मौत की सजा के अमल पर लगी रोक 23 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी है. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने पीपुल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

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सुरेंद्र कोली (फाइल फोटो)
सुरेंद्र कोली (फाइल फोटो)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी हत्याकांड के मुख्य मुजरिम सुरेंद्र कोली की मौत की सजा के अमल पर लगी रोक 23 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी है. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने पीपुल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

जनहित याचिका में कहा गया कि कोली की राष्ट्रपति के सामने दायर दया याचिका के निबटारे में ‘संवैधानिक प्राधिकारों की तरफ से देरी’ के कारण उसकी सजा पर अमल ‘असंवैधानिक’ है और उसकी मौत की सजा को कम करके आजीवन कारावास में तब्दील किया जाना चाहिए.

‘समय के अभाव’ के कारण इस मामले में सुनवाई स्थगित करते हुए, अदालत ने यह भी आदेश दिया कि 23 दिसंबर को सुनवाई के समय, जनहित याचिका के साथ मौत की सजा के खिलाफ कोली की अपील को नत्थी किया जाए.

नोएडा के कारोबारी और सह आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के नौकर कोली को 14 साल की लड़की रिम्पा हल्दर की हत्या मामले में मौत की सजा मिली थी. निचली अदालत में कई मामले में कोली के साथ दोषी ठहराया गया पंढेर फिलहाल जमानत पर रिहा है. गौरतलब है कि नोएडा के सेक्टर 31 में पंढेर के बंगले के पास मौजूद निठारी गांव के कई लोगों ने नाबालिग लड़कियों समेत अपने बच्चों के लापता होने की शिकायतें की थीं. इसके बाद दिसंबर 2006 में सीरियल मर्डर का खुलासा हुआ था. जांच के दौरान, घर के पास से कई कंकाल मिले थे.

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भाषा से इनपुट

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