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बाहुबली राजा भैया के करीबी MLC अक्षय प्रताप को मिली जमानत, कोर्ट ने कल 7 वर्ष की सुनाई थी सजा

UP News: 23 मार्च यानी बीते दिन 7 साल की सजा पाने वाले एमएलसी अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल जी की जमानत याचिका दूसरे दिन ही मंजूर हो गई और उन्हें गुरुवार शाम जेल से रिहा कर दिया गया.

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जिला कारागार से रिहा हुए एमएलसी अक्षय प्रताप. (फाइल फोटो) जिला कारागार से रिहा हुए एमएलसी अक्षय प्रताप. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रभारी जिला जज ने वकील की दलील को सुनकर सजा पर स्टे दिया
  • तुरंत मंजूर हुई जमानत की अपील

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवर्तमान विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप को जिला अदालत ने गुरुवार को जमानत दे दी. फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को ही उन्हें 7 वर्ष की सजा सुनाई थी. अक्षय प्रताप के जेल से हुए रिहा होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के करीबी निवर्तमान एमएलसी अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल जी ने 6 सितंबर 1997 को नगर कोतवाली के सिविल लाइन एरिया का पता दिखा कर एक रिवाल्वर का शस्त्र लाइसेंस लिया था. जांच में उनका पता अवैध पाया गया था. तत्कालीन नगर कोतवाल डीपी शुक्ला ने इस मामले में आईपीसी की धारा 420, 468 और 471 में मुकदमा पंजीकृत करके चार्जशीट लगाकर कोर्ट भेज दी थी. 

इसी मामले में अब तक चले ट्रायल में एमपी-एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट बलराम दास जायसवाल ने 15 मार्च को सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया, फिर 22 मार्च को फैसले के दिन अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल जी को कोर्ट में पेश होने को कहा, जहां उनको कोर्ट ने हिरासत में लेने का आदेश दिया और 23 मार्च को फैसला सुनाने का दिन रखा. उस दिन फिर उनको भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया. जहां अदालत ने अक्षय प्रताप को 7 साल की सजा सुनाई और 25 हज़ार का अर्थ दंड लगाया. इसके बाद 24 तारीख को जिला जज की अदालत में मामले को पेश किया. 

आखिर बचाव पक्ष के वकील ने क्या दी दलील, जिससे एक ही दिन में रिहा हुए अक्षय प्रताप

बचाव पक्ष के अधिवक्ता शचीन्द्र प्रताप सिंह ने गुरुवार यानी 24 मार्च को जिला जज की अदालत में मामले को पेश किया और दलील दी कि जब मजिस्ट्रेट को पता गलत देकर हमने लाइसेंस बनवा लिया है, तो जिलाधिकारी कमिश्नर ने इतने वर्षों तक उसको बहाल कैसे रखा है? अक्षय प्रताप के वकील ने कहा, लाइसेंस आज भी बहाल है. शस्त्र क्लर्क वगैरह ने अदालत को गवाही में बताया था कि विधिक प्रक्रिया के अनुपालन में निर्गत लाइसेंस न गलत पते पर है और न ही फर्जी है. तहसीलदार की रिपोर्ट है. लेखपाल की रिपोर्ट है. पुलिस अधीक्षक की भी संस्तुति है. इन सारे अधिकारियों की रिपोर्ट पर लाइसेंस को जिलाधिकारी ने निर्गत किया हैं. मैंने उन्हीं को आधार बनाया. इसी आधार पर न्यायालय ने हमारी प्रार्थना स्वीकार की और सजा पर स्टे देते हुए तुरंत जमानत दे दी. 

जनसत्ता दल से MLC का पर्चा भी भर चके हैं गोपाल जी 

राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल से गोपाल जी ने कुछ दिन पहले एमएलसी के लिए नामांकन पत्र भी दाखिल किया है. हालांकि, मामले को गंभीरता से देखते हुए गोपाल जी ने अपनी पत्नी मधुरिमा सिंह को भी एमएलसी के लिए निर्दलीय नामांकन करा दिया था. हालांकि, कोर्ट से सजा पर स्टे मिलने से अक्षय प्रताप की फिर से चुनाव लड़ने की संभावना तेज़ हो गई है. 
 

 

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