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पंचायत चुनाव: सीट SC के लिए रिजर्व, मुस्लिम को कैसे मिला सर्टिफिकेट, BJP सांसद ने उठाए सवाल

लखनऊ के मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद का कहना है कि संविधान के आदेश 1950 के पैरा 3 में साफतौर पर लिखा है यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति मुस्लिम धर्म के रीति रिवाज से रहता है तो वह अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा.

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बीजेपी सांसद कौशल किशोर (फोटो-आजतक)
बीजेपी सांसद कौशल किशोर (फोटो-आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सांसद ने ट्वीट के जरिए चुनाव खारिज की मांग की
  • कसमंडी खुर्द के प्रधान पद की सीट SC के लिए आरक्षित
  • सलीम का जाति प्रमाण पत्र अनुसूचित जाति में कैसे बनाः MP

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद गांव पंचायत कसमंडी खुर्द में हुए ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से बीजेपी सांसद कौशल किशोर ने सोशल मीडिया के जरिए सवाल खड़े किए हैं. साथ ही उन्होंने ग्राम प्रधान पद का चुनाव फिर से कराए जाने की मांग की.

अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद कौशल किशोर ने आज शनिवार को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएमओ ऑफिस को टैग करते हुए लिखा कि जनपद लखनऊ के विकासखंड मलिहाबाद की गांव पंचायत कसमंडी खुर्द के प्रधान पद का आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित था. जो प्रधान पद का चुनाव जीता है, उसको जीतने का प्रमाण पत्र सलीम के नाम से जारी हुआ है. पत्नी भी मुस्लिम है तो आखिर सलीम का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र कैसे बना यह बड़ा सवाल है?

दरअसल लखनऊ के विकासखंड मलिहाबाद की गांव पंचायत, कसमंडी खुर्द का प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था और यहां से अनुसूचित जाति के उम्मीदवार को चुनाव लड़ना था. ऐसे में सलीम नामक मुस्लिम व्यक्ति ने अनुसूचित जाति के आधार पर चुनाव लड़ा. इसी मामले को लेकर बीजेपी सांसद ने सवाल खड़े किए हैं.

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SC की श्रेणी में नहीं आते मुस्लिमः MP

लखनऊ के मोहनलालगंज से बीजेपी सांसद का कहना है कि पता चला है कि सलीम की शादी मुस्लिम लड़की से हुई है. सलीम मुस्लिम धर्म के रीति रिवाज और इस्लाम धर्म को मानता है और भारतीय संविधान के आदेश 1950 के पैरा 3 में यह साफतौर पर लिखा है यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति मुस्लिम धर्म के रीति रिवाज से रहता है और मुस्लिम धर्म का अनुपालन करता है तो वह अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा.

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उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर फिर कैसे सलीम का जाति प्रमाण पत्र अनुसूचित जाति में बना? यह जांच का विषय है. इसकी जांच होनी चाहिए और प्रमाण पत्र रद्द होना चाहिए और साथ ही साथ कसमंडी खुर्द गांव पंचायत का चुनाव रद्द होना चाहिए.

अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर ने आगे कहा कि ग्राम पद का चुनाव फिर से होना चाहिए क्योंकि ये अनुसूचित जाति के अधिकारों का हनन है.

 

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