भारत में गुम हुई एक मूक बधिर पाकिस्तानी लड़की की उसके घर लौटने में मदद करने पर हिन्दुस्तानी बजरंगी भाईजान के लिए हम सबने जमकर तालियां पीटीं और सीटियां बजाई. लेकिन असल जिंदगी में भी एक शख्स है, जिसे 'बजरंगी' जैसे ही किसी नेकदिल फरिश्ते की जरूरत है.
जी हां, अलीगढ़ के जयगंज में रहने वाली सलमा इसी उम्मीद में जी रही है कि शायद उसके 24 साल के बेटे 'सलमान ' को कोई कराची से वापस हिन्दुस्तान ले आए. अपने बेटे से बिछड़ने की सलमा की यह दुखभरी दास्तान शुरु हुई 1994 में, जब सलमा अपने 2 बेटों के साथ नूरी वीजा पर पकिस्तान गईं. यह वीजा उन पाकिस्तानी महिलाओं को दिया जाता है जिनकी शादी हिन्दुस्तान में हुई हो.
नूरी वीजा के मुताबिक सलमा पाकिस्तान में 90 दिनों तक रह सकती थीं. लेकिन वापसी के वक्त सलमा का एक ही बेटा उनके साथ था. पकिस्तान में सलमान बीमार पड़ गया. बिना इलाज कराए वो उसे साथ नहीं ला सकती थीं. और खुद भी 90 दिन से ज्यादा पकिस्तान में नहीं रुक सकती थीं. न तो सलमा अपना वीजा बढ़वा पाईं और न ही बेटे के ठीक होने का इंतजार कर पाईं.
आज भी अपने बेटे की घर वापसी की उम्मीद लगाए सलमा हाथ में सलमान की दो तस्वीरें लिए रहती हैं. एक 1993 में भारत में ली गई तस्वीर है जिसमें सलमान उनकी गोद में बैठा है और दूसरी 2006 में पाकिस्तान में ली गई तस्वीर है जिसमें सलमान बड़ा हो गया है.

सलमान को पाकिस्तान में रहते हुए 2 दशक बीत चुके हैं. पकिस्तान में सलमान अपने नाना-नानी के पास रहा. सलमा की एक निस्संतान बहन ने उसे अनौपचारिक रूप से गोद भी ले लिया. लेकिन अब उसके नाना गुजर चुके हैं और नानी की सेहत भी ठीक नहीं है.
सलमान को गोद लेने वाली सलमा की बहन भी अब उसकी फिक्र नहीं करती. सलमान खुद भी अपनी अम्मी के पास हिन्दुस्तान लौटना चाहता है. पर सलमा और उसके सारे परिवार की कोशिशें अभी तक नाकाम रही हैं.
सलमा तमाम सरकारी दफ्तरों के दरवाजे खटखटा चुकी हैं, लेकिन उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे यह जाहिर होता हो कि सलमान हिंदुस्तानी है या पाकिस्तानी.