उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में समाजवादी पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए प्रत्याशी वंदना यादव को एक प्रस्तावक भी नहीं मिला, जिसकी वजह से वे नामांकन भी दाखिल नहीं कर सकीं. सपा के लिए जिले में यह शर्मनाक स्थिति रही. वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रत्याशी जयंती राजपूत के निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने जाने का सपना भी अधूरा रह गया.
बीजेपी की ऐसी स्थिति इसलिए बनी क्योंकि पंचायत चुनावों में बीजेपी की ओर से टिकट मांग रहे दुष्यंत सिंह ने निषाद पार्टी से अपना नामांकन जमा कर हड़कंप मचा दिया. दरअसल पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर उनकी जगह पर पूर्व अध्यक्ष जयंती राजपूत को टिकट दे दिया था.
दुष्यंत सिंह अब बीजेपी से बगावत करते हुए निषाद पार्टी की टोपी पहनकर मैदान में कूद पड़े हैं. दुष्यंत सिंह का कहना है कि उनके साथ 9 सदस्य हैं. अगर प्रशासन ने गड़बड़ी नहीं की तो उनकी जीत पक्की है.
हमीरपुर: जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए पुराने चेहरों के बीच फिर से होगा घमासान
बीजेपी की बढ़ी मुश्किल
उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी, बीजेपी के साथ मिलकर 22 का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीटों के बंटवारे में लगी हुई है, तो दूसरी तरफ निषाद पार्टी ने हमीरपुर जिले में अपना प्रत्याशी उतारकर बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. ऐसे में बीजेपी प्रत्याशी जयंती राजपूत के निर्विरोध अध्यक्ष बनने के ख्वाब पर पानी फिर गया गया है.
कौन हैं जयंती राजपूत?
बीजेपी ने जयंती राजपूत को जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार घोषित किया है. जयंती राजपूत ने सपा की वंदना यादव को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाकर अध्यक्ष पद संभाल लिया था. हाईकोर्ट में जब यह मामला गया, तब कोर्ट ने जयंती राजपूत का निर्वाचन रद्द कर दिया था, फिर वंदना यादव को दोबारा अध्यक्ष घोषित कर दिया था.