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ग्रेटर नोएडा: 77 गांव पानी की चपेट में, तिलवाड़ा में NDRF ने कई को बचाया

हथिनीकुंड बैराज से आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है. पानी के नोएडा-ग्रेटर नोएडा तक पहुंचने से पहले ही तटीय गांवों में लोगों पर नई आफत आ गई है.

पानी के बढ़ने से गांव के लगभग 20 परिवार नदी के दूसरे छोर पर फंस गए (तनसीम हैदर) पानी के बढ़ने से गांव के लगभग 20 परिवार नदी के दूसरे छोर पर फंस गए (तनसीम हैदर)

  • 18 अगस्त को हथिनीकुंड से पानी छोड़ा गया था जिसके बाद जलस्तर बढ़ गया
  • 40 साल में पहली बार हथिनीकुंड बैराज से सबसे ज्यादा पानी छोड़ा गया है
  • एनडीआरएफ की टीम ने 5 महिलाओं, 2 बच्चों और 3 पुरुषों को सुरक्षित निकाल लिया

दिल्ली की बाढ़ का खतरा अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा तक पहुंच गया है. हथिनीकुंड बैराज से आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है. पानी के नोएडा-ग्रेटर नोएडा तक पहुंचने से पहले ही तटीय गांवों में लोगों पर नई आफत आ गई है. दरअसल, हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद ओखला बैराज पर पहले से जमा पानी को भी छोड़ना पड़ा. ओखला बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण ग्रेटर नोएडा के तिलवाड़ा गांव में सब्जी की खेती करने वाले लगभग 20 किसानों के परिवार मवेशियों सहित यमुना की दूसरी ओर फंस गए.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के 77 गांव पानी की चपेट में आ गए हैं. ग्रेटर नोएडा में पड़ने वाले गांव तिलवाड़ा, घरबरा और मोतीपुर पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. पानी के अचानक बढ़ने से तिलवाड़ा गांव के लगभग 20 परिवार नदी के दूसरे छोर पर फंस गए. मदद करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय विधायक भी प्रभावित इलाके में पहुंचे लेकिन पानी का स्तर ज्यादा होने की वजह से एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया जिसके बाद फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया.

एनडीआरएफ की टीम ने 5 महिलाओं, 2 बच्चों और 3 पुरुषों को सुरक्षित निकाला. एनडीआरएफ टीम के कमांडर विपिन प्रताप ने बताया कि कुछ लोग पहले ही वहां से अपने मवेशियों को लेकर हरियाणा की तरफ सुरक्षित निकल गए थे.

बता दें 18 अगस्त को हथिनीकुंड से पानी छोड़ा गया था. पानी छोड़ने की जानकारी जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई थी लेकिन बावजूद ऐसी स्थिति बनी. वहीं तिलवाड़ा गांव में मौजूद लेखपाल ने बताया कि उन्होंने पहले ही लोगों को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा, "मैं तीन दिन से लगातार इन लोगों को समझा रहा था कि नदी के पार ना जाएं लेकिन ये नहीं माने. लोगों का कहना था कि इससे उनकी फसल का नुकसान हो जाएगा."

वहीं स्थानीय विधायक भी लोगों के फंसे होने की जानकारी पाकर तिलवाड़ा गांव पहुंच गए. उन्होंने कहा कि 40 साल में सबसे ज्यादा पानी इस बार छोड़ा गया है. अगर पानी घरों तक पहुंचता है, तो लोगों के निकालने की उनके पास पूरी व्यवस्था है. इसके अलावा विधायक ने बताया कि इन तटीय गांव तक पहुंचने के लिए सड़क व्यवस्था सही नहीं है जिसे दुरुस्त कराया जा रहा है ताकि देर रात किसी प्रकार की आपात स्थिति होने पर लोगों को घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके. बता दें चालीस साल में हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया आठ लाख क्यूसेक पानी सबसे ज्यादा है.

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