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गाजीपुर पर क्यों बैकफुट पर आईं दो सरकारें? किसानों के तंबू उखड़ने से लेकर खूंटा गाड़ने तक की कहानी

राकेश टिकैत के आंसू के कारण केंद्र और यूपी सरकार बैकफुट पर आ गई हैं. किसान अब अपना आंदोलन और तेज कर रहे हैं. रात को ही पड़ोसी राज्यों से किसानों के जत्थे दिल्ली की ओर रवाना होना शुरू हो गए. भिवाणी, मेरठ, बागपत से रात को ही किसान दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

गाजीपुर बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो-PTI) गाजीपुर बॉर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं से बदला माहौल
  • गाजीपुर बॉर्डर पर खत्म होते-होते आंदोलन में फिर जुड़े किसान

किसान आंदोलन को लेकर सरकार और किसानों के एक गुट के बीच तनातनी और बढ़ गई है. दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर देर रात चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस खाली हाथ लौट गई. यहां पुलिस के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई थी. रात 1 बजे पुलिस फोर्स यहां से चली गई. इसके बाद आंदोलनकारियों ने राहत की सांस ली.

इससे पहले भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई थी और उसके बाद गाजियाबाद प्रशासन की तरफ से गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को स्थल छोड़ने की वॉर्निंग दी गई थी, लेकिन रात होते होते दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने अपने कदम पीछे खींच लिए. माना जा रहा है कि राकेश टिकैत के आंसुओं के कारण केंद्र और यूपी सरकार बैकफुट पर आ गई हैं.

इस बीच किसान अब अपना आंदोलन और तेज कर रहे हैं. रात को ही पड़ोसी राज्यों से किसानों के जत्थे दिल्ली की ओर रवाना होना शुरू हो गए. भिवाणी, मेरठ, बागपत से रात को ही किसान दिल्ली के लिए रवाना हो गए. टिकैत नए सिरे से आंदोलन में जान फूंकने में लगे हैं.

किसानों के तंबू उखड़ने से लेकर खूंटा गाड़ने तक की कहानी

दरअसल, 26 जनवरी की हिंसा के कारण किसान संगठन बैकफुट पर आ गए थे और सरकार फ्रंटफुट पर खेलने लगी थी. जगह-जगह से प्रदर्शनकारियों को हटाने का सिलसिला शुरू हो गया. कहीं डंडे के जोर पर, तो कहीं मान-मनौव्वल से प्रदर्शनकारियों को घर वापस भेजा जाना शुरू कर दिया गया.

इसके साथ ही गाजीपुर बॉर्डर पर प्रशासन ने बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैट ने गुरुवार दोपहर ऐलान किया कि हम अपना आंदोलन खत्म कर देंगे. इसके बाद गाजियाबाद प्रशासन की तरफ से धरना स्थल खाली करने आदेश दिया गया. एक तरफ दिल्ली पुलिस के जवान थे और दूसरी तरफ यूपी पुलिस. एनएच-24 को बंद कर दिया गया.

थोड़ी देर में किसान नेता राकेश टिकैत ने मंच से संबोधन दिया. इस दौरान वो रो पड़े. राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए आंदोलन खत्म करने से मना कर दिया. राकेश टिकैत ने साफ कर दिया कि अगर तीनों किसान कानून वापस नहीं होंगे तो वो आत्महत्या कर लेंगे. टिकैत के भावुक होकर रोने के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर देर रात माहौल बदला नजर आया.

गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत रो पड़े तो उनके गांव में बवाल बढ़ गया. मुजफ्फरनगर में नरेश टिकैत ने रात में इमरजेंसी पंचायत बुला ली. इस पंचायत में हजारों किसान पहुंचे. किसानों की एकजुटता के आगे केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार बौनी नजर आई. गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को हटाने के लिए लगाई गई पुलिस फोर्स को वापस बुला लिया गया.

इसके साथ ही शाम के समय हटा लंगर भी यहां प्रदर्शनकारी किसानों ने दोबारा शुरू कर दिया. इन लोगों का कहना है कि वो कृषि कानून को वापस लेने की उनकी मांग के पूरा होने तक यहां से नहीं हटेंगे.  मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, खुर्जा से किसान आ रहे हैं.

उधर मुजफ्फरनगर में भी किसान आंदोलन को लेकर गहमागहमी है. कल यहां महापंचायत में आंदोलन जारी रखने का फैसला हुआ था. आज एक बार फिर यहां सरकारी कॉलेज परिसर में महापंचायत होगी. बीकेयू के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा.

बताया जा रहा है कि आज पूरे दिन के माहौल को देखा जाएगा, उसके बाद ही योगी सरकार कोई कदम आगे बढ़ाएगी. इसके पीछे की एक बड़ी वजह ये है कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में टिकैत बंधुओं का प्रभाव है. कुछ महीनों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने हैं. उसके बाद अगले साल यूपी में विधानसभा हैं. ऐसे में बीजेपी सरकार फूंक-फूंककर कदम बढ़ाना चाहेगी. 

 

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