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अगर UP पुलिस 'दबंग' तो कोबरा बनेगा 'डॉन नं.-1'

बुंदेलखंड में महिलाओं के लिए काम करने वाले जन संगठन 'नागिन गैंग' का सहयोगी संगठन 'कोबरा' दक्षिण भारत की हिन्दी फिल्म 'डॉन नं-1' के नायक 'सूर्या' से प्रेरणा लेकर महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर विराम लगाने का हौसला हासिल करेगा.

उत्तर प्रदेश पुलिस जहां हिन्दी फिल्म 'दबंग' और 'सिंघम' देखकर अपनी बिगड़ी छवि सुधारने जा रही है, वहीं बुंदेलखंड में महिलाओं के लिए काम करने वाले जन संगठन 'नागिन गैंग' का सहयोगी संगठन 'कोबरा' दक्षिण भारत की हिन्दी फिल्म 'डॉन नं-1' के नायक 'सूर्या' से प्रेरणा लेकर महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर विराम लगाने का हौसला हासिल करेगा.

उत्तर प्रदेश के पुलिस अपर महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अरुण कुमार ने हाल में पुलिस अधिकारियों को पांच पृष्ठों का परिपत्र जारी कर अपने अधीनस्थों को 'दबंग' और 'सिंघम' जैसी हिन्दी फिल्में दिखाने का निर्देश दिया है.

'दबंग' और 'सिंघम' देखकर पुलिसकर्मी प्रेरणा लें या न लें, पर बुंदेलखंड़ का महिला जन संगठन 'नागिन गैंग' ने महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रही हिंसा को रोकने के लिए अपने सह संगठन 'कोबरा' के पुरुष पदाधिकारियों को दक्षिण भारत की हिन्दी फिल्म 'डॉन नं.-1' के नायक 'सूर्या' के नक्शेकदम पर चलने का फरमान जारी किया है. इस फिल्म को देखने के लिए हर कार्यकर्ता को एक-एक डीवीडी कैसेट दी गई है.

नागिन गैंग की वाइस चीफ कमांडर मनोज सिंह का कहना है कि इस हिन्दी फिल्म का शुरुआती डॉयलाग 'विद्या के मंदिर में पाप की घंटिया मत बजाना, वरना मौत का घंटा बजाएगा सूर्या भाई' पर अमल करने की आवश्यकता है. तभी महिलाओं के विरुद्ध हिंसा पर विराम लग सकेगा.

नागिन गैंग के सहायक संगठन 'कोबरा' की मुखिया नेहा कैथल (शीलू) ने बताया कि इस फिल्म में सूर्या रेप करने वाले पुलिस अधिकारी को सरेआम मौत की सजा देता है. इसी वजह वह डॉन होकर भी लोगों के दिलों पर राज करता है.

बकौल नेहा, कोबरा के सभी 10 पुरुष पदाधिकारियों को इस फिल्म की डीवीडी वितरित की गई है. नेहा ने कहा, 'कोबरा, नागिन गैंग का सहयोगी संगठन है, जो महिला हिंसा के खिलाफ पुरुष वर्ग को जागरुक करेगा और महिलाओं व बच्चियों की आबरू की हिफाजत करेगा. यदि इस पर भी हिंसा नहीं रुकी तो कानून में निहित प्रावधानों के तहत सजा भी दी जा सकती है.'

कुल मिलाकर फिल्मी प्रेरणा लेने में पुलिस और नागिन गैंग एक-दूसरे को पीछे धकेलने में लगे हैं. एक तरफ जहां पुलिस महकमा हिन्दी फिल्मों के जरिए अपनी बिगड़ी छवि सुधारने का प्रयास करेगा, वहीं दूसरी ओर महिला हिंसा के इजाफे से त्रस्त महिला जन संगठन फिल्मी अंदाज में आरोपियों से निपटने की तैयारी करेगा.

देखना यह है कि फिल्मी नसीहत इन दोनों में से किसके लिए फायदेमंद साबित होती है.

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