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'दूध लाने निकला था बेटा और लगी उसे गोली, पुलिस ने घर नहीं लाने दिया शव'

बिजनौर जिले के नहटौर में CAA के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा के दौरान अनस नाम के युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी. अनस के पिता ने बताया है कि पुलिस ने बेटे का शव भी घर नहीं ले जाने दिया, यहां तक कि शव को बिना नहलाए और बिना नमाज के ही दफनाने का दबाव बनाया गया. हालांकि, बाद में इजाजत दे दी और अपने घर से 20 किलोमीटर दूर बेटे के शव को दफनाया.

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यूपी के बिजनौर में हिंसा के दौरान मारे गए युवक अनस के पिता (फोटो- आजतक)
यूपी के बिजनौर में हिंसा के दौरान मारे गए युवक अनस के पिता (फोटो- आजतक)

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन में 20 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा की घटना सामने आई. पत्थरबाजी, आगजनी और फायरिंग भी देखने को मिली. अब तक 19 आम लोग इस हिंसा का शिकार हो चुके हैं. इनमें बिजनौर जिले के नहटौर कब्से का युवक अनस भी शामिल है, जिसकी गोली लगने से मौत हुई है. बेटे को खोने के बाद अनस के पिता ने आजतक से अपना दर्द बयां किया और बताया कि कैसे पुलिस ने बेटे के शव को घर तक नहीं ले जाने दिया.

अनस के पिता अरशद हुसैन ने आजतक को  20 दिंसबर को हुए घटनाक्रम की जानकारी दी और बताया कि कैसे उनके बेटे को गली लगी और उसकी जान चली गई. अरशद हुसैन ने बताया, 'मेरा लड़का मेरे पास ही खड़ा था. हम नमाज पढ़कर आए थे. इसके बाद वो घर आ गया. फिर वो मेरे पास आ गया और कहने लगा कि मैं ताय अब्बा के घर से दूध लेने जा रहा हूं. मैंने कहा डेयरी पर देख ले. तो उसने कहा कि सभी डेयरी बंद हैं तो मैं ताय अब्बा के घर से लेने जा रहा हूं. बराबर में ही हमारे बड़े भाई का घर है. जैसे ही उसने गली पार की, उधर से फायरिंग हो रही थी पुलिस की. उसे भी अंदाजा नहीं था फायरिंग का. जैसे ही गोली लगी तो वहां लड़कों ने कहा कि गोली चल गई...गोली चल गई...काले कोट में एक लड़का था उसे गोली लग गई.

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काले कोट में मेरा लड़का अनस था...

बेटे को जहां गोली लगी, उसके नजदीक ही अरशद हुसैन खड़े हुए थे. जैसे ही गोली लगने का शोर हुआ तो वो भागकर वहां पहुंचे और बेटे को जख्मी देख उनके होश उड़ गए. अरशद हुसैन ने बताया, 'मैंने बोला काले कोट में तो अनस था. हम सब भागे तो मेरा लड़का गोली लगे हुए पड़ा था. फिर मैंने उसे उठाया. उधर से गोली चल रही थी, तो मैं उसी के ऊपर लेट गया. फिर मैं साइड में हो गया, कहीं मुझे भी गोली न लग जाए. एक भतीजा और भांजा आए. फिर उसे घसीटकर यहां लाए और मोटरसाइकिल पर डालकर डॉक्टर के पास ले गए. डॉक्टर ने पट्टी करके कहा कि बिजनौर ले जाइए, ये सीरियस है.'

खून से सन गए मेरे कपड़े...

अनस के पिता ने बताया, 'मेरे पूरे कपड़े खून में तर हो गए. उन्होंने कहा कि तुम कपड़े बदल लो. जब तक मैं बदलकर पहुंचा तो अनस को बिजनौर ले जाए. लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.'

घर तक नहीं लाने दिया शव...

अनस के पिता ने बताया का पुलिस ने उनके बेटे को शव को घर तक नहीं ले जाने दिया. यहां तक कि शव को बिना नहलाए और बिना नमाज-ए जनाजा के ही दफनाने का दबाव बनाया. अनस के पिता ने बताया, 'बिजनौर में मौत के बाद बॉडी रात के वक्त यहां (नहटौर) ले आए. पुलिस आ गई और बॉडी ले गई. हम भी पहुंच गए हॉस्पिटल. पुलिस ने कहा कि सुबह आना. फिर रात में ही फोन आ गया कि बॉडी ले जाओ. हम रात को 11 बजे अस्पताल पहुंचे. लेकिन सुबह 6 बजे तक बॉडी नहीं दी. पुलिस ने कहा कि बिजनौर में ही दफना दो. हमने कहा कि यहां हमारा कब्रिस्तान नहीं है, न कोई रिश्तेदार है. सात बज गए लेकिन बॉडी नहीं दी. फिर हमने कहा कि मिठान गांव (मेरी ससुराल) में बॉडी ले जाने दो. इसके बाद पुलिस हमारे साथ मिठान गई. पुलिस ने कहा कि बॉडी को दफनाओ. हमने कहा कि नहलाया जाता है, नमाज होती है, कफन पहनाया जाता है तब बॉडी दफनाई जाती है. तो पुलिस ने कहा कि ऐसे ही दबा दो.

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अनस के पिता ने बताया कि इस दौरान पुलिसकर्मियों में एक मुस्लिम पुलिसवाले भी थे. फिर उन्होंने समझाया और कहा कि कब्र तैयार करो. तब तक पुलिस गांव से करीब 500 मीटर दूर ही एंबुलेंस में बॉडी को रखे रही. इसके बाद हमारी जब तैयारी हो गई तो उन्होंने बॉडी दी और हमने अपने घर (नहटौर) से 20 किलोमीटर दूर गांव में बेटे के शव को दफन किया. हमारा कोई रिश्तेदार भी वहां नहीं पहुंचा.

सात महीने का बच्चा है...

अरशद हुसैन ने बताया कि अनस उनका बड़ा बेटा था. उसका सात महीने का बच्चा है. अनस शादियों में कॉफी और जूस लगाता था और मजदूरी करता था. मैं सिलाई का काम करता हूं.

मैं बस शांति चाहता हूं...

अनस के पिता अरशद हुसैन ने पुलिस से अपील करते हुए कहा कि जो बेकसूर लोग हैं उन्हें छोड़ दें. नहटौर की अवाम से कहना चाहता हूं कि मेरा बेटा मर गया, लेकिन मैं अब सुकून चाहता हूं. देश के अंदर भाईचारा बना रहे.

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