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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वसूली के आदेश पर लगाई रोक

कोर्ट ने राज्य सरकार व अन्य विपक्षियों से 8 हफ्ते में जवाब मांगा हैं. कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी किया है. दरअसल, मांगी गई जानकारी ना देने पर सूचना आयुक्त ने अर्थदंड लगाया था जिसके बाद यूपी लोक सेवा आयोग ने वसूली कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी थी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट. (फाइल फोटो) इलाहाबाद हाई कोर्ट. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वसूली के आदेश पर लगाई रोक
  • मुख्य सूचना आयुक्त लखनऊ की ओर से दिया गया था आदेश

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. हाई कोर्ट ने मुख्य सूचना आयुक्त लखनऊ की ओर से जारी वसूली आदेश पर रोक लगा दी है. जस्टिस सलिल कुमार राय की एकल पीठ ने आदेश दिया है. 

कोर्ट ने राज्य सरकार व अन्य विपक्षियों से 8 हफ्ते में जवाब मांगा हैं. कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी किया है. दरअसल, मांगी गई जानकारी ना देने पर सूचना आयुक्त ने अर्थदंड लगाया था जिसके बाद यूपी लोक सेवा आयोग ने वसूली कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी थी.

उधर, इलाहाबाद हाई कोर्ट के अलग-अलग वर्ग के अधिकारियों का प्रमोशन किया गया है. महानिबंधक आशीष गर्ग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अनूप कुमार राय को निबंधक (कम्पलायंस) बनाया गया है.

वहीं, निजी सचिव सेवा संवर्ग के हेमंत रंजन को सहायक निबंधक सह निजी सचिव श्रेणी-2 से उप निबंधक सह निजी सचिव श्रेणी-3 पद पर प्रमोट किया गया है. अनुराग वर्मा को निजी सचिव श्रेणी एक पद से सहायक निबंधक सह निजी सचिव श्रेणी-2 और ऋषभ कुमार को अपर निजी सचिव के पद से निजी सचिव श्रेणी-1 पद पर प्रमोट किया गया है.

 

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