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उपचुनाव से पहले बसपा में बड़ा फेरबदल, मायावती बोलीं- जी जान से जुट जाएं सभी

मायावती ने पार्टी के तीन मंडलों को मिलाकर एक जोन बना दिया है और मंडल प्रमुखों को जोन इंचार्ज बनाया गया है. इसके अलावा मंडल कोऑर्डिनेटर अब मुख्य जोन इंचार्ज के रूप में काम करेंगे. इसके साथ ही मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा कि वो उपचुनाव में जी जान से जुट जाएं.

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती (File Photo) बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती (File Photo)

उत्तर प्रदेश की 12 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में बड़ा फेरबदल हुआ है. बहुजन समाज पार्टी की 9 मंडलों की बैठक के बाद मायावती ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के नाम संदेश जारी किया है.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तीन मंडलों को मिलाकर एक जोन बनाया गया है. मंडल प्रमुख अब जोन इंचार्ज के रूप में काम करेंगे, जबकि मंडल कोऑर्डिनेटर अब मुख्य जोन इंचार्ज के रूप में काम करेंगे. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि बूथ लेवल पर कमेटी का रिव्यू किया जाए. सभी बड़े और छोटे पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपचुनाव में जी जान से जुट जाएं. पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी जनता के बीच जाएं.

आपको बता दें कि शनिवार को बसपा की 9 मंडलों की बैठक खत्म हो गई. इस बैठक में उपचुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. साथ ही जिन 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उन सभी पर प्रत्याशी उतारने का फैसला लिया गया. इससे पहले लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें मायावती की अपेक्षा के मुताबिक नतीजे नहीं आए थे.

इसके बाद दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया. समाजवादी पार्टी से गठबंधन खत्म करने के बाद बहुजन समाज पार्टी ने उपचुनाव अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है. सूत्रों के मुताबिक इससे पहले गठबंधन में दोनों दलों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि लोकसभा चुनाव में सपा मायावती को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश कर अपनी रजामंदी देगी, तो बसपा विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश करेगी.

मिशन-2022 का लक्ष्य

लोकसभा चुनाव में 10 सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद अब बसपा उपचुनाव के सहारे 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी करना चाहती है. मायावती को लगता है कि उनकी पार्टी उपचुनाव में भी ज्यादा सीटों पर जीत हासिल कर लेगी, जिसका फायदा विधानसभा चुनाव में भी हो सकता है.

पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की लहर और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बावजूद मायावती अपना 'बेस वोट' बचाने में कामयाब रही हैं. यही वजह है कि मायावती ने उपचुनाव में अकेले हाथ अजमाने का फैसला लिया है. माना जा रहा है कि बसपा उपचुनाव की 12 में से कम से कम चार सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है.

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