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अरुण जेटली का उत्तर प्रदेश से खास लगाव, रायबरेली के विकास पर थी पैनी नजर

अरुण जेटली का निधन शनिवार दोपहर में 12.07 मिनट पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुआ. उनका उत्तर प्रदेश से भी गहरा नाता रहा है पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा था.

अरुण जेटली (फाइल फोटो) अरुण जेटली (फाइल फोटो)

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन शनिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुआ. अरुण जेटली बीजेपी के बड़े नेताओं मे शुमार रहे हैं. उनके निधन से बीजेपी को गहरा झटका लगा है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वित्तमंत्री व रक्षामंत्री रहे अरुण जेटली अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिवंगत नेता कहलाएंगे.

जेटली का उत्तर प्रदेश से भी गहरा नाता रहा है. पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा था. जेटली ने सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली को अपना नोडल जिला चुना था.

जेटली के प्रतिनिधि और भाजपा प्रवक्ता हीरो वाजपेयी ने मीडिया को बताया कि रायबरेली के विकास के लिए पूर्व वित्तमंत्री लगातार चिंतित रहते थे. जेटली मानते थे कि कांग्रेस के गढ़ रायबरेली को विकास की अभी भी बहुत जरूरत है.

उन्होंने नोडल जिला रायबरेली के लिए अपनी सांसद निधि से 250 सोलर लाइट लगाने का पत्र जिलाधिकारी को लिखा था. इस कार्य के लिए उन्होंने सांसद निधि से ढाई करोड़ रुपये भी खर्च किए थे.

उन्होंने कहा कि जेटली ने रायबरेली के लिए विकास योजनाओं के प्रस्ताव भी मांगे थे. उनकी बीमारी के कारण तय तारीख से एक सप्ताह पहले 100 सोलर लाइट लगाने का प्रस्ताव बनकर विकास भवन पहुंचा था. बीमारी के कारण बहुत सारे काम अटके हुए थे उनकी सोच विकास पुरुष जैसी थी.

पुराने दिनों को याद करते हुए भाजपा प्रवक्ता हीरो वाजपेयी ने बताया कि अरुण जेटली का लखनऊ से गहरा संबंध था. वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव प्रचार से हमेशा जुड़े रहते थे.

जेटली अटल जी के नामांकन से एक दिन पहले ही लखनऊ आ जाते थे और नामांकन पत्र की खुद ही बारीकी से जांच करते थे. वह नामांकन के समय अधिवक्ता की हैसियत से अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मौजूद रहते थे.

चुनाव प्रचार के दौरान जेटली खुद वकीलों के बीच जाकर भाजपा के लिए वोट मांगते थे. साल 2007-09 में जेटली को उत्तर प्रदेश प्रभारी भी बनाया गया था. जेटली ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए उप्र में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए काफी काम किया था.

28 दिसंबर, 1952 को जन्मे अरुण जेटली ने 24 अगस्त, 2019 को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आखिरी सांस ली. वे 66 साल के थे.

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