उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही है. यह बात इसलिए अहम है क्योंकि यूपी में ऐसा पहली बार हो रहा है जब बीजेपी का कोई मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर रहा है. योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को यूपी के सीएम पद की शपथ ली थी.
सीएम बनने के बाद पिछले तीन वर्षों में योगी आदित्यनाथ ने तमाम बड़े और कड़े फैसले लिए हैं. योगी सरकार द्वारा लिए गए कई फैसले ऐसे भी थे जिसका काफी विरोध भी हुआ.
नुकसान की रिकवरी के लिए लाए अध्यादेश
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उपद्रवियों से क्षतिपूर्ति वसूलने के लिए शुक्रवार 13 मार्च 2020 को हुई कैबिनेट मीटिंग में उत्तर प्रदेश रिकवरी पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश पारित किया गया. यूपी रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश के तहत एक ट्रिब्यूनल बना रही है. इस ट्रिब्यूनल में रिटायर्ड जिला जज चेयरमैन होंगे.
अध्यादेश के मुताबिक ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के अलावा एक और सदस्य होगा. यह सदस्य असिस्टेंट कमिश्नर लेवल का होगा. वहीं इस ट्रिब्यूनल के फैसले को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी क्योंकि इस ट्रिब्यूनल के पास अदालती अधिकार होंगे.
प्रदर्शनकारियों की तस्वीर लगवाई
योगी सरकार ने नागरिकता संसोधन कानून सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा मामले में आरोपियों पर कार्रवाई की थी. इसी कड़ी में लखनऊ में प्रशासन ने विभिन्न चौराहों पर 57 कथित प्रदर्शनकारियों के लगभग सौ पोस्टर लगवाए. प्रशासन ने इन सभी के खिलाफ 1.55 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए नोटिस जारी किया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तस्वीर और पते के साथ होर्डिंग लगाने पर सरकार को फटकार लगाते हुए 16 मार्च तक हटाने को कहा था.
यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और आदेश पर रोक लगाने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मामला बड़ी बेंच को ट्रांसफर कर दिया था.
प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर कसी नकेल
18 जून 2019 को योगी मंत्रिमंडल द्वारा प्राइवेट यूनिवर्सिटी को लेकर एक अध्यादेश (उत्तर प्रदेश प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ऑर्डिनेंस 2019) पारित किया गया था. इस अध्यादेश के मुताबिक अब प्राइवेट विश्वविद्यालयों को एक शपथ पत्र देना होगा कि यूनिवर्सिटी किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और न ही कैंपस में इस तरह की गतिविधियां होने दी जाएंगी. अगर ऐसा हुआ तो यह कानून का उल्लंघन माना जाएगा और सरकार यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
पुलिस को दी एनकाउंटर की छूट
योगी सरकार की ओर से राज्य में बिगड़ी कानून-व्यवस्था और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई. जिसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कई एनकाउंटर हुए. इनमे से कई एनकाउंटर पर सवाल भी खड़े हुए. सीएम योगी ने एक टीवी इंटरव्यू में साफ-साफ कहा था, "लोग अगर अपराध करेंगे, ठोक दिए जाएंगे."
एंटी-रोमियो स्क्वॉड का किया था गठन
सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही योगी आदित्यनाथ ने अपने संकल्प पत्र पर काम करना शुरू कर दिया था. 21 मार्च 2017 को एंटी-रोमियो स्क्वॉड बनाने के आदेश जारी किए थे. इस दल का उद्देश्य यूपी में स्कूलों और कॉलेजों के बाहर लड़कियों से छेड़छाड़ रोकना था. इस एंटी रोमियो स्क्वॉड के तहत हर थाने में एक सब इंस्पेक्टर के तहत 4 कॉन्स्टेबल के साथ एक टीम बनाई गई थी. शुरू में चौक-चौराहों और लड़कियों के स्कूल कॉलेज के बाहर सादी वर्दी में यह स्क्वॉड तैनात भी दिखता था लेकिन लेकिन दिन-हफ्ते और महीने बीतने के साथ-साथ एंटी रोमियो स्क्वॉड भी अपनी मारक क्षमता खोता गया.
भगवा रंग में रंगी गई थीं तमाम चीजें
यूपी में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ कलर कोड भी बदलता रहा . मायावती शासन में चारों तरफ नीला, अखिलेश सरकार में लाल और हरा दिखता था. राज्य में योगी सरकार आने के साथ ही सबकुछ भगवामय होता नजर आया. सीएम की कुर्सी पर पड़े तौलिए से लेकर बेड पर बिछी चादर, सब भगवा रंग में दिखाई देती रही है. इसके अलावा परिवहन निगम की बसों, प्रदेश के कई जिलों के सरकारी महकमों की बिल्डिंग भी भगवा रंग में रंगी गई.
सरकार बदलने के साथ ही मुख्यमंत्री व मंत्रियों के आवास से लेकर, एनेक्सी भवन, स्कूल और हज हाउस की दीवारों को भगवा रंग में रंग दिया गया था, विवाद के बाद कइयों की दोबारा पुताई भी कराई गई थी. राजधानी लखनऊ में डिवाइडर, पार्क और साइकिल ट्रैक पर भी भगवा रंग चढ़ाया गया था. यही नहीं बलरामपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले आवासों का भगवा रंग और हमीरपुर के भगवा शौचालय ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं.
बदल दिए थे शहरों के नाम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 अक्टूबर 2018 को यूपी के मशहूर शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने का ऐलान किया था. इसके बाद सीएम योगी ने दीपोत्सव के दिन घोषणा की थी कि फैजाबाद जिला अब से अयोध्या के नाम से जाना जाएगा. 13 नवंबर 2018 को हुई कैबिनेट मीटिंग में फैजाबाद मंडल का नाम बदल कर अयोध्या मंडल और इलाहाबाद मंडल का नाम बदल कर प्रयागराज मंडल किए जाने के फैसले पर मुहर लगा दी गयी .
इसके बाद इस तरह की भी कई खबरें आई थीं कि योगी सरकार कई और शहरों के नाम बदलने की तैयारी कर रही है. इसमें सबसे आगे बस्ती और गाजीपुर जिलों के नाम बदले जाने की चर्चा सबसे ज्यादा है. यहां आपको यह भी बता दें कि इन दोनों शहरों का नाम बदलने से पहले मुगलसराय जंक्शन रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पं दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन किया चुका है. यह स्टेशन यूपी के चंदौली जिले के अंतर्गत आता है.
सावन में कई रूट पर नॉनवेज की बिक्री की गई थी बैन
योगी सरकार ने सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के मार्ग पर मांस व मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था. इसके अलावा एक अन्य फैसले में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सड़क किनारे काटे जाने वाले मुर्गे और बकरे की दुकानों को बंद करने का भी आदेश दिया था.
कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से की गई थी पुष्प वर्षा
योगी सरकार ने कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा के आदेश दिए थे. जिसके बाद यूपी के कई जिलों से कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश किए जाने की खबरें, तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे.