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Agra: ताजमहल के जिन 22 कमरों को खोलने की हो रही मांग, वे 88 साल पहले भी खुले थे

Taj Mahal case : ताजमहल के 22 कमरों को खोलने की याचिका को हाईकोर्ट ने गुरुवार को फटकार लगाते हुए खारिज कर दिया है. अब इस मामले को याचिकाकर्ता डॉक्टर रजनीश सिंह सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहे हैं.

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ताजमहल के पीछे की तरफ हैं 22 कमरे ताजमहल के पीछे की तरफ हैं 22 कमरे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कमरे खुलवाने वाली याचिका हाईकोर्ट ने कर दी है खारिज 
  • याचिकाकर्ता को कोर्ट ने जमकर लगाई थी फटकार

अभी तक लोग ताजमहल की सुंदरता और उसकी नायाब निर्माण शैली देखने जाते थे लेकिन अब लोग खासकर उन 22 कमरों को देखने पहुंच रहे हैं, जिन्हें खुलवाने के लिए मांग की जा रही है. ताजमहल के 22 कमरों में क्या है, इसको लेकर लोगों के मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे हैं. आजतक भी इस राज को जानने के लिए दिल्ली से आगरा पहुंच गया.

ताजमहल पहुंचते ही हमारी मुलाकात गाइड वृजेश से हुई. उसने ताजमहल का दीदार कराना शुरू किया. धीरे-धीरे में आजतक के संवाददाता ताजमहल के उस हिस्से में जा पहुंचे जो यमुना नदी से बिल्कुल सटा हुआ है, यहां आते ही उनकी नजर ताले जड़े दरवाजों पर पड़ी. 

यहां बराबर में लगी जालीनुमा खिड़कियों से झांकने की कोशिश की तो सामने की तरफ कुछ आकृतियां नजर आईं. वहीं रास्ते की ओर इशारा करते हुए गाइड ने बताया कि यह रास्ता उन्हीं 22 कमरों तक जाता है. आखिरी बार 1934 में भारतीय पुरातव विभाग ने इन दरवाजों को खोला था.

हर कमरे में जाने के हैं अलग रास्ते

आजतक के संवाददाता को पता चला कि 22 कमरों में 4 बड़े और 18 कमरे छोटे हैं. इसके अलावा हर कमरे में जाने का रास्ता बिल्कुल अलग है. वहीं ऊपर से नीचे जाने के 6 रास्ते हैं, जो ताजमहल के प्रथम तल से जाते हैं. 

शाहजहां के लिखे तीन पत्र मिले

ताजमहल से जुड़े तीन पत्रों का होता है जिक्र

आमतौर मुगल काल में जिन भी इमारतों का निर्माण हुआ है, उससे संबंधित दस्तावेज सुरक्षित हैं लेकिन ताजमहल को लेकर बहुत ज्यादा दस्तावेज सामने नहीं आते हैं. जो दस्तावेज हैं उनमें 3 मुख्य पत्रों का ही जिक्र किया जाता है.

इतिहासकार राज किशोर राजे बताते हैं कि केवल 3 पत्र बादशाह ने लिखे थे. पहला ताजमहल में पत्थरों की आवश्यकता के लिए, दूसरा कुशल करीगरों के लिए और तीसरा अतिरिक्त संसाधन के लिए. यह एक तरह से ताजमहल के निर्माण कार्य को गुप्त रखने की तरफ इशारा करता है.

पीएन ओक की किताब से तेज हुई चर्चा

हिंदू संगठन मांग कर रहे हैं कि ताजमहल का नाम तेजो महालय किया जाना चाहिए. दरअसल, ताज महल का 'तेजो महालय' नाम सबसे पहले एक मराठी किताब से आया. इसके लेखक पीएन ओक ने 1960 से 70 के दशक में ताजमहल, फतेहपुर सीकरी और लाल किले को लेकर कई किताबें लिखी थीं.

ओक ने किताब 'Taj Mahal: The True Story’ में ताजमहल की जगह शिवमंदिर होने की बात कही थी. उन्होंने दावा किया था कि यह स्मारक 1155 में बना था यानी मुगलों के शासन से दशकों पहले.

दरवाजे खुलवाने वाली याचिका खारिज

ताजमहल के 22 कमरे खुलवाने पहुंचे याचिकाकर्ता डॉक्टर रजनीश को गुरुवार को हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि क्या आप मानते हैं कि ताजमहल को शाहजहां ने नहीं बनाया है? क्या हम यहां कोई फैसला सुनाने आए हैं? जैसे कि इसे किसने बनवाया या ताजमहल की उम्र क्या है?

कोर्ट ने कहा कि आपको जिस टॉपिक के बारे में पता नहीं है, उस पर रिसर्च कीजिए, एमए-पीएचडी कीजिए, अगर आपको कोई संस्थान रिसर्च नहीं करने देता है तो हमारे पास आइए. कोर्ट ने पूछा कि बंद कमरों की जानकारी मांगने वाले आप कौन हैं.

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