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वाराणसी सीरियल ब्लास्ट: मौलाना अरशद मदनी बोले- वलीउल्लाह की फांसी की सजा के फैसले को हाईकोर्ट में देंगे चुनौती

कसूरवार ठहराए गए वलीउल्लाह पर संकट मोचन मंदिर और वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर विस्फोट की साजिश रचने, उन्हें अंजाम तक पहुंचाकर आतंकवाद फैलाने का आरोप 4 जून को सिद्ध हो चुका है .

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वाराणसी में 16 साल पहले सीरियल ब्लास्ट हुए थे (फाइल फोटो)
वाराणसी में 16 साल पहले सीरियल ब्लास्ट हुए थे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 7 मार्च 2006 को वाराणसी में हुए थे सीरियल ब्लास्ट
  • कोर्ट ने वलीउल्लाह को सुनाई फांसी की सजा

2006 Varanasi Serial Blast: वाराणसी में हुए सीरियल ब्लास्ट केस में गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने आतंकी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाई है. जिसके बाद मौलाना अरशद मदनी ने ऐलान किया है कि संकट मोचन मंदिर सीरियल बम ब्लास्ट मामले के गुनहगार मुफ़्ती वलीउल्लाह का मुकदमा हाईकोर्ट में लड़ेंगे. 

गाजियाबाद की विशेष सेशन कोर्ट के जज जितिंद्र कुमार सिन्हा ने 6 जून को 2006 में हुए संकट मोचन मंदिर सिरियल बम ब्लास्ट में वलीउल्लाह को फांसी की सज़ा सुनाई है. 

मुफ़्ती वलीउल्लाह का संबंध उत्तर प्रदेश के फूलपूर से है. पिछले दस वर्षों से आरोपी को जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से क़ानूनी मदद दी जा रही थी. जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बम विस्फोट के एक मामले में गाजियाबाद सेशन कोर्ट द्वारा मुफ़्ती वलीउल्लाह को दी गई फांसी की सज़ा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौदी दी जाएगी. हमें पूरा भरोसा है कि हाई कोर्ट से वलीउल्लाह को पूरा न्याय मिलेगा. 

उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जिनमें निचली अदालतों ने सज़ाएं दीं मगर जब वह मामले हाई कोर्ट में गए तो पूरा इन्साफ़ हुआ. इसका एक बड़ा उदाहरण अक्षरधाम मंदिर हमले का मामला है. जिसमें निचली अदालत ने मुफ़्ती अब्दुल कय्यूम समेत तीन लोगों को फांसी और चार लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा दी थी. यहां तक कि गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस फ़ैसला को बरक़रार रखा था. लेकिन जमीअत उलमा-ए-हिंद की क़ानूनी सहायता के नतीजे में जब यह मुक़दमा सुप्रीमकोर्ट में गया तो यह सारे लोग न केवल सम्मानपूर्वक बरी हुए बल्कि निर्दोषों को आतंकवाद के इल्ज़ाम में फांसने पर अदालत ने गुजरात पुलिस को कड़ी फटकार भी लगाई थी. 

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गौरतलब है कि वाराणसी के संकट मोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन पर साल 2006 में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे. इन धमाकों में 18 लोगों की मौत हुई थी और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. उसी शाम को दशाश्वमेध घाट पर भी विस्फोटक मिले थे.

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