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क्यों बढ़ाया गया तेलंगाना का IAS कैडर? अब राज्य में होंगे 218 अफसर, जान‍िए वजह

तेलंगाना की बढ़ती प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच केंद्र सरकार ने राज्य के IAS कैडर की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है. नए संशोधन के तहत अब राज्य में कुल 218 IAS पद स्वीकृत होंगे. केंद्र का कहना है कि ये कदम शासन व्यवस्था को मजबूत करने और बढ़ते प्रशासनिक दबाव को बेहतर तरीके से संभालने के उद्देश्य से उठाया गया है.

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46 IAS officers transferred in UP
46 IAS officers transferred in UP

तेलंगाना की बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर की संख्या बढ़ा दी है. अब तेलंगाना में IAS के कुल स्वीकृत पद 218 हो गए हैं. इससे पहले यह संख्या 208 थी.

केंद्र ने ये फैसला भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर संख्या निर्धारण) संशोधन विनियम, 2026 के तहत लिया है. ये संशोधन तेलंगाना सरकार से परामर्श के बाद किया गया है और 9 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है. अधिसूचना कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत आने वाले कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने जारी की है.

कैडर की नई संरचना क्या होगी?

संशोधित नियमों के मुताबिक, तेलंगाना सरकार के तहत वरिष्ठ ड्यूटी पदों की संख्या 119 तय की गई है. इसके अलावा कैडर में अलग-अलग श्रेणियों के तहत नीचे दिए जा रहे आरक्षित पद भी शामिल हैं. 

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति आरक्षित: 47 पद
राज्य प्रतिनियुक्ति आरक्षित: 29 पद
प्रशिक्षण आरक्षित: 4 पद
अवकाश आरक्षित और कनिष्ठ पद आरक्षित: 19 पद
इस तरह कुल मिलाकर IAS कैडर की संख्या अब 218 तक पहुंच गई है.

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भर्ती कैसे होगी?

अधिसूचना के अनुसार, इन 218 पदों में से 66 पदों पर पदोन्नति के जरिए नियुक्ति की जाएगी. ये नियुक्तियां IAS (भर्ती) नियम, 1954 के नियम 8 के तहत होंगी. वहीं 152 पदों पर सीधी भर्ती के जरिए IAS अधिकारियों की तैनाती की जाएगी.

क्यों बढ़ाया गया कैडर?

अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में शासन, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए IAS कैडर की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया है ताकि प्रशासनिक कामकाज को ज्यादा प्रभावी और सुचारु बनाया जा सके.

अधिसूचना में साफ कहा गया है कि ये संशोधन अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 और IAS (कैडर) नियम, 1954 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किया गया है और इसके लिए तेलंगाना सरकार से औपचारिक परामर्श लिया गया है. कुल मिलाकर, ये कदम तेलंगाना के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप अफसरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम फैसला माना जा रहा है.

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