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गोदावरी जल विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तेलंगाना का आरोप, 'फ्लड वॉटर' के नाम पर ज्यादा पानी ले रहा आंध्र

तेलंगाना ने कोर्ट में ये भी सवाल उठाया कि जिस ‘फ्लड वॉटर’ के नाम पर पानी डायवर्ट किया जा रहा है, उसकी कोई स्पष्ट परिभाषा तय ही नहीं की गई है. सिंहवी के मुताबिक, गोदावरी अवॉर्ड के तहत तेलंगाना को करीब 960 एमजीडी पानी मिलना है, लेकिन आंध्र प्रदेश की कार्रवाई से ये हिस्सा प्रभावित होगा.

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गोदावरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच चल रहा विवाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. तेलंगाना सरकार ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश गोदावरी जल बंटवारे के अवॉर्ड का उल्लंघन कर रहा है और 'फ्लड वॉटर' के नाम पर अतिरिक्त पानी डायवर्ट करने की तैयारी कर रहा है.

तेलंगाना का आरोप: तय हिस्से से ज्यादा पानी ले रहा आंध्र

तेलंगाना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंहवी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि तेलंगाना एक अपर रिपेरियन स्टेट है और गोदावरी अवॉर्ड के तहत उसका पानी तय है. इसके बावजूद आंध्र प्रदेश केंद्रीय जल आयोग (CWC) और जल शक्ति मंत्रालय के निर्देशों को नजरअंदाज कर अतिरिक्त पानी डायवर्ट कर रहा है.

सिंहवी ने कहा कि आंध्र प्रदेश करीब 200 एमजीडी (MGD) अतिरिक्त पानी ले रहा है, जिससे तेलंगाना को गंभीर नुकसान होगा. उन्होंने बताया कि तेलंगाना नया राज्य है और कई बैराज और जल संरचनाएं अभी निर्माणाधीन हैं.

‘फ्लड वॉटर’ की कोई परिभाषा नहीं: तेलंगाना

तेलंगाना ने कोर्ट में ये भी सवाल उठाया कि जिस ‘फ्लड वॉटर’ के नाम पर पानी डायवर्ट किया जा रहा है, उसकी कोई स्पष्ट परिभाषा तय ही नहीं की गई है. सिंहवी के मुताबिक, गोदावरी अवॉर्ड के तहत तेलंगाना को करीब 960 एमजीडी पानी मिलना है, लेकिन आंध्र प्रदेश की कार्रवाई से ये हिस्सा प्रभावित होगा.

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CJI का सवाल: क्या इससे तेलंगाना का हिस्सा घटेगा?

मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या तेलंगाना ये कहना चाहता है कि नया डायवर्जन उसके जल हिस्से को कम कर देगा. इस पर सिंहवी ने कहा कि जैसे ही नया डायवर्जन कैनाल बना, अतिरिक्त 200 एमजीडी पानी की गणना करनी पड़ेगी और एक बार पानी डायवर्ट हो गया तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता.

इस पर CJI ने सुझाव दिया कि कोर्ट ये स्पष्ट कर सकता है कि आंध्र प्रदेश द्वारा किया गया कोई भी नया निर्माण तेलंगाना के जल हिस्से को प्रभावित नहीं करेगा और ऐसा कोई भी काम आंध्र प्रदेश अपने जोखिम पर करेगा. हालांकि, सिंहवी ने CWC की हाइड्रोलॉजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पानी का डायवर्जन स्थायी असर डालता है और बाद में उसे पलटना संभव नहीं होता.

तेलंगाना ने कोर्ट को बताया कि 2 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार ने इस विवाद को सुलझाने के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी बनाई थी, जिसमें सभी संबंधित पक्ष शामिल हैं. इसके बावजूद आंध्र प्रदेश बिना केंद्र या CWC की मंजूरी के नए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है.

पोलावरम प्रोजेक्ट पर भी विवाद

तेलंगाना का आरोप है कि मई 2022 से आंध्र प्रदेश ये दावा कर रहा है कि पोलावरम प्रोजेक्ट में बदलाव से जल बंटवारा प्रभावित होगा, जबकि इन बदलावों को न तो केंद्र सरकार और न ही CWC की मंजूरी मिली है. जल शक्ति मंत्रालय ने 2022 में कैनाल टनल चौड़ी न करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद काम जारी है.

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200 TMC पानी डायवर्ट करने का आरोप

तेलंगाना ने जून 2025 की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गोदावरी का फ्लड वॉटर कृष्णा नदी में डायवर्ट करने की योजना है, लेकिन इसमें ‘फ्लड वॉटर’ की कोई परिभाषा नहीं दी गई है. तेलंगाना का दावा है कि इससे करीब 200 टीएमसी (TMC) पानी डायवर्ट किया जाएगा.

आंध्र प्रदेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल केवल प्रोजेक्ट प्रस्ताव और डीपीआर तैयार की जा रही है. उन्होंने कहा कि इससे गोदावरी अवॉर्ड पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पानी रायलसीमा जैसे सूखा प्रभावित इलाकों के लिए जरूरी है.

CJI: पोलावरम केंद्रीय परियोजना है

CJI ने साफ कहा कि पोलावरम एक केंद्रीय परियोजना है और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना कोई ठोस काम नहीं हो सकता. कोर्ट ने ये भी पूछा कि जब एक वैधानिक समिति इस मुद्दे पर विचार कर रही है तो तेलंगाना सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आया. सिंहवी ने जवाब दिया कि समिति के पास निर्माण पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है और ऐसे में तेलंगाना के पास कोर्ट आने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. उन्होंने इसे तेलंगाना के लोगों से जुड़ा एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा बताया.

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कोर्ट ने सुझाई मध्यस्थता

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को मध्यस्थता (मेडिएशन) पर विचार करने की सलाह दी. कोर्ट ने कहा कि ये मामला गंभीर है और इसमें विशेषज्ञ राय की जरूरत पड़ेगी. अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी और कहा कि तब तक दोनों पक्ष मध्यस्थता की संभावना पर विचार करें.

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