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फेंकू नरेंद्र मोदी हैं या नीतीश कुमार..और आपको पप्पू कौन बना रहा है?

मोदी का पटना भाषण. नीतीश कुमार ने इस भाषण के पुर्जे उड़ा दिए और साबित कर दिया कि मोदी को इतिहास-भूगोल नहीं आता. जब मोदी ने कहा कि सिकंदर को बिहारियों ने वापस धकेला, जब तक्षशिला को बिहार में बता दिया और जब चन्द्रगुप्त को गुप्त वंश का बता दिया. बड़ी छीछालेदर हुई मोदी की, पर नीतीश ने की उसके बाद. पहले दिन कोई प्रश्न नहीं. मोदी ने किया हुंकार. जब नीतीश ने पुर्जे उड़ाए तो फिर मोदी को इतिहास नहीं आता, भूगोल भी नहीं. पर सच में ऐसा है क्या?

पटना रैली में मोदी, जहां से शुरू हुए ऐतिहासिक सबक पटना रैली में मोदी, जहां से शुरू हुए ऐतिहासिक सबक

हमारे गुरुजी एक कहानी सुनाते थे, डॉ शुक्ला की. बड़े नामचीन सर्जन थे. अपने या अपने अपनों को चिरवाने की नौबत भगवान ना लाए पर अगर ऐसी नौबत आती तो लोग डॉ.शुक्ला के हाथों पर ही विश्वास करते.20 साल की बेहतरीन और मानवता को समर्पित सेवा के बाद आखिरकार वह दिन आ ही गया जब एक ऑपरेशन के दौरान उन्होंने एक मरीज़ के पेट में कैंची छोड़ दी. पता चलने के बाद फिर से ऑपरेशन किया और कैंची निकल आई. पर डॉ शुक्ला नहीं निकल पाए, अपनी नई छवि से. अब जब लोग उनका परिचय देते तो कहते वही डॉ.शुक्ला जो मरीजों के पेट में कैंचियां छोड़ देते हैं. मरीजों और कैंचियां, बहुवचन पर गौर कीजिए. और छोड़ देते हैं, न कि छूट गई थी एक बार. सर्जरी के लिए मशहूर आदमी, कैंचियां छोड़ने के लिए बदनाम हो गया. साल में एक गलती नहीं. एक गलती और बीस साल पर बीस पड़ी. सत्य और छवि, कद और साए में इतना इतना क्रूर अंतर.

आरुषि-हेमराज की हत्या में आरुषि के मम्मी-पापा दोषी पाए गए. पर क्या कोर्ट का फैसला आने के पहले ही आपने मन नहीं बना लिया था कि दोषी कौन है. दिल पर हाथ रखकर कहिए. आज आप को लग रहा है कि आप सही थे, अगर फैसला आपकी राय के मुताबिक़ है. या लग रहा है कि सब गलत है, क्योंकि फैसला आपकी राय के मुताबिक़ नहीं है. पर जो आपकी राय है क्या वह आपकी राय है? अगर आपने राय बनाई थी तो आपकी होगी पर अगर बनी बनाई, पकी पकाई आई थी तो भी आपकी हो गई होगी. हम सूचना क्रांति के युग में रहते हैं. इतनी सारी सूचनाएं हैं कि हमारा दिमाग उसको प्रोसेस नहीं कर पाता. प्रोसेसिंग से ही विचार निकलते हैं, मत बनता है. पर वक़्त कहां है. बहुत लोग हमें अपना मत या विचार सूचना या समाचार के वर्क में थमा जाते हैं. दोनों के लिए आसान होता है. हम उसी राय को अपना बना लेते हैं. जैसे कि तेजपाल हमेशा से गिरा हुआ आदमी था. मनमोहन सिंह सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री हैं. आम आदमी पार्टी आम आदमी की तरह ईमानदार है. भाजपा साम्प्रदायिक पार्टी है. मुलायम मुसलमानों के हितैषी हैं और मायावती दलितों की मसीहा हैं. या फिर मोदी फेकू हैं, उनका इतिहास और भूगोल गोल है.

एक उदाहरण लेते हैं जो सबसे लोकप्रिय भी है. मोदी का पटना भाषण. नीतीश कुमार ने इस भाषण के पुर्जे उड़ा दिए और साबित कर दिया कि मोदी को इतिहास-भूगोल नहीं आता. जब मोदी ने कहा कि सिकंदर को बिहारियों ने वापस धकेला, जब तक्षशिला को बिहार में बता दिया और जब चन्द्रगुप्त को गुप्त वंश का बता दिया. बड़ी छीछालेदर हुई मोदी की, पर नीतीश ने की उसके बाद. पहले दिन कोई प्रश्न नहीं. मोदी ने किया हुंकार. जब नीतीश ने पुर्जे उड़ाए तो फिर मोदी को इतिहास नहीं आता, भूगोल भी नहीं. पर सच में ऐसा है क्या? आइए मोदी के भाषण और नीतीश की व्याख्या पर एक नज़र डालें.
1. बिहार के गौरवशाली इतिहास का बखान करते हुए मोदी ने कहा, ‘गुप्तवंश को याद करें तो चन्द्रगुप्त की राजनीति हमें प्रेरणा देती हैं.’
इस पर मोदी के इतिहास ज्ञान की खिल्ली उड़ाते नीतीश ने कहा, ‘मौर्य वंश के चन्द्रगुप्त को गुप्त वंश का बता गए.’
सच ये है.चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य गुप्तवंश के थे और पाटलिपुत्र के ही थे. मौर्य वंश के चन्द्रगुप्त मौर्य थे. दोनों महान थे. गुप्तवंश वाले ने अपने राज्य का विस्तार बखूबी किया था और गुजरात,सौराष्ट्र और मालवा को अपने राज्य में मिलाया था.इतना बड़ा कि उन्हें उज्जैन में राजधानी बनानी पड़ी थे.

2. मोदी ने कहा: अगर हम ज्ञान युग को याद करें तो नालंदा और तक्षशिला का स्मरण होता है.
नीतीश ने कहा: तक्षशिला अब पाकिस्तान में है पर उसको भी बिहार में बता गए.
सच ये है...
नीतीश सही कह रहे हैं तक्षशिला पाकिस्तान में है. पर मोदी ने कब कहा कि वह बिहार में है? अगर आप कहें कि विश्वशांति में भारत का योगदान है क्योंकि शांति के दूतों का ध्यान करें तो महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला का नाम आता है. इसका मतलब यह नहीं की तीनों भारत के थे. इसका मतलब तो यही है कि जिन नामों का स्मरण होता है उसमें एक भारत का है.

3. मोदी ने कहा: जब सिकंदर आया. तब वह सारा विश्व विजय करके आया था. और जब बिहार से लोहा लेने की बारी आई तब क्या हुआ...
वो दीने इलाही का बेबाक बेड़ा
नक्शा जिसका अक्सा ए आलम में पहुंचा
किए पांच सौ पार सातों समंदर
न अमन में झिझका न कुल्जाम में ठिठका
वो डूबा दहाबे में गंगा के आकर
ये ताकत थी हमारे सैनिकों की. उन्होंने सिकंदर को परास्त किया उसको मार कर के भेजा.
नीतीश ने कहा: सिकंदर को गंगा नदी के किनारे तक ले आए. वो तो सतलज के पहले से ही भाग गया. उसकी फौज कमज़ोर पड़ गई थी. बीमार पड़ने लगे थे. रास्ते में मर भी गए. गंगा नदी के पास तक नहीं आ पाए थे.
सच क्या है...
नीतीश सही हैं पर ऊपर की पंक्तियां मोदी की नहीं हैं. वह अल्ताफ हुसैन ‘हाली’ की मुसद्दस हैं जिसमें वह सिकंदर की नहीं इस्लाम की बात कर रहे हैं कि कैसे इस्लाम दुनिया पर विजय पाता हुआ यहां आया और गंगा के मुंह में समा गया. यहीं का हो गया. पढ़ें असल मुसद्दस...
वो दीने हिजाजी का बेबाक बेड़ा
निशां जिसका अक्सा ए आलम में पहुंचा
मजाहिम हुआ कोई खतरा न जिसका
किए पेशे पार सातों समंदर
न अमन में झिझका न कुल्जाम में ठिठका
वो डूबा दहाने में गंगा के आकर

गौर करिए मोदी की निंदा करने में हाली का ज़िक्र तक नहीं आया. मोदी ने गलत कविता के गलत अंशों को किसी और सन्दर्भ में जोड़ दिया. इसकी चर्चा तक नहीं हुई और लोग इतिहास और भूगोल में उलझ गए.
पर आपने, हमने इस बात की चिंता नहीं की. क्योंकि मोदी की छवि फेंकने वाले की बना दी गई गई है तो अगर कहीं त्रुटियां हों, तथ्यों की गड़बड़ी हो तो वह मोदी पर आसानी से चस्पा हो जाता है. और किसी के मुंह से तथ्य इधर का उधर हो जाए तो वह जुबान का फिसलना होता है. मोदी के मामले में मोदी की अज्ञानता या फेंकना हो जाता है. जैसे अन्य लोग गंभीर बातें करें तो गंभीर पर राहुल गांधी करें तो मूर्खतापूर्ण. क्योंकि हमने उन्हें पप्पू मान लिया है और उस छवि में वह फिट बैठ गए.
वह नहीं बैठे. उन्हें बैठा दिया गया. हम मोदी के बयानों का सत्यापन स्वयं नहीं करते. किसी के तथाकथित सत्यापन को सत्य मान लेते हैं. राहुल गांधी के बयानों का अर्थ नहीं समझते, किसी ने मज़ाक उड़ा दिया और हम बस हंस लेते हैं. जैसे कि गरीबी एक मानसिक अवस्था है. यह एक संस्कृत के प्रसिद्द श्लोक का हिंदी अनुवाद भर है. पश्चिमी चिन्तक और लेखक बर्नार्ड हेअर ने जब यही कहा था तब लोगों ने सुन कर हामी भरी थी. कोई अर्थशास्त्री बोले तो हामी और राहुल बोले तो नाकामी.
झूठ सच के चोगे में घूम रहा है पर चोगा उतारे कौन. वक़्त किसके पास है.

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