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विजय माल्या केस में जीत के बाद CBI की चेतावनी- भगोड़ों को जरूर पकड़ेंगे

सीबीआई ने कहा है कि आर्थिक अपराध के मामले में जांच का सामना करने वाले खुद को प्रक्रिया से ऊपर नहीं मान सकते. वह भी केवल इसलिए कि उन्होंने न्यायिक क्षेत्र बदल लिया हो.

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विजय माल्या केस में ब्रिटिश हाई कोर्ट के फैसले को CBI ने बताया बड़ी जीत (फाइल फोटो)
विजय माल्या केस में ब्रिटिश हाई कोर्ट के फैसले को CBI ने बताया बड़ी जीत (फाइल फोटो)

  • ब्रिटिश हाई कोर्ट के फैसले को मील का पत्थर बताया
  • कहा- न्यायिक क्षेत्र बदलकर प्रक्रिया से ऊपर न समझें

बैंकों के साथ हजारों करोड़ रुपये के लेनदेन में धोखाधड़ी के आरोपी शराब कारोबारी विजय माल्या के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है. ब्रिटेन हाई कोर्ट ने विजय माल्या की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच से प्रत्यर्पण के फैसले को चुनौती देने की अनुमति मांगी गई थी. केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है.

भारत में मुकदमे का सामना करने के लिए शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के केस में ब्रिटिश हाई कोर्ट के फैसले को मील का पत्थर बताते हुए सीबीआई ने आर्थिक अपराध में वांछित अपराधियों को चेतावनी दी है. सीबीआई ने कहा है कि तुम भाग सकते हो, लेकिन हम तुम्हें पकड़ेंगे. सीबीआई ने कहा है कि आर्थिक अपराध के मामले में जांच का सामना करने वाले खुद को प्रक्रिया से ऊपर नहीं मान सकते. वह भी केवल इसलिए कि उन्होंने न्यायिक क्षेत्र बदल लिया हो.

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सीबीआई ने इसे अपनी श्रमसाध्य जांच पर मोहर बताते हुए कहा कि माल्या ने साक्ष्यों के साथ ही जांच पर सवाल उठाए थे. गौरतलब है कि आईडीबीआई बैंक से 900 करोड़ रुपये के लोन में धोखाधड़ी, क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी और सरकारी कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करने के मामले में विजय माल्या और अन्य के खिलाफ 24 जनवरी, 2017 को चार्जशीट दायर की गई थी. चार्जशीट दायर किए जाने के बाद 31 जनवरी को भारतीय अधिकारियों ने साल 2017 में ही 31 जनवरी को माल्या के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था.

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विजय माल्या को ब्रिटिश पुलिस ने उसी साल 20 अप्रैल को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई. अप्रैल 2017 से अब तक, सीबीआई ने तीन साल तक विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए जटिल कानूनी लड़ाई लड़ी. सीबीआई ने ब्रिटिश कोर्ट को मानवाधिकार के मानदंडों और प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुपालन का भरोसा दिलाया और माल्या के तमाम पैंतरों के बावजूद यह प्रमाणित किया कि कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए माल्या को भारत लाया जाना क्यों आवश्यक है.

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