फिर वही मुहब्बत, वही यूपी, वैसा ही ताज, लेकिन शाहजहां हैं फैजल हसन कादरी. दरअसल, 81 साल के कादरी की ख्वाहिश है कि अपनी दिवंगत मुमताज
की याद में मिनी ताज बनाएं. सारी उम्र क्लर्क की नौकरी में काटी. सारी बचत, ग्रेच्युटी, पीएफ, पीपीएफ सब खर्च कर दिया 'मिनी ताज' बनवाने में. चार
साल हो गए, ताज है कि पूरा होने का नाम नहीं लेता. काम चलता है, पैसे खत्म हो जाते हैं, फिर रुक जाता है. 14 लाख रुपये खर्च हो चुके. अब न बचत
बची और न ही आय का कोई स्रोत. लिहाजा यूपी सरकार कादरी की मदद के लिए आगे आई है. ताज से अखिलेश का लगाव हाल में ताजमहल का ट्विटर हैंडल शुरू होने के दौरान भी जगजाहिर हुआ था.
जल्द मिलेंगे CM अखिलेश
ताजमहल की यह
प्रतिकृति बुलंदशहर के कासर कलां गांव में बन रही है. कादरी की दीवानगी देख मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रोजेक्ट की जानकारी मांगी है. जिला कलेक्टर
बी चंद्रकला ने बताया कि उन्होंने कादरी को मिलने के लिए बुलाया है. जल्द ही अखिलेश कादरी से मिलेंगे. कादरी की इच्छा है कि मरने के बाद उन्हें पत्नी
के बगल में ही दफनाया जाए.