लालकृष्ण आडवाणी ने एक बार फिर अपने ब्लॉग के जरिए यूपीए सरकार पर हमला बोला है. अपने ताजा ब्लॉग में उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार को अब भ्रष्टाचार से पहचाना जाता है और सरकार बहाने तलाशती है. आडवाणी ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में सरकार की जमकर आलोचना हुई है.
आडवाणी ने ब्लॉग में लिखा, 'संसद और मीडिया दोनों ही जगहों पर पिछले महीने सभी चर्चाओं का केन्द्र बिन्दु गंभीर आर्थिक संकट रहा, जिसका सामना देश कर रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में भयावह गिरावट आई है.' उन्होंने लिखा कि कई स्तंभकारों ने रुपये में गिरावट और आर्थिक मंदी को नियंत्रित करने में विफल रहने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की जमकर निंदा की है.
अपने ब्लॉग में आडवाणी ने मीडिया खबरों का विस्तार से हवाला देते हुए कहा कि यूपीए सरकार की पहचान भ्रष्टाचार से जुड़ती जा रही है और वह बहाने तलाशने का प्रयास करती है, जिसमें अर्थव्यवस्था के सामने पेश आ रही दिक्कतों के लिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा कथित रूप से अपने पूर्व मंत्री पर दोष मढ़ने का प्रयास शामिल है.
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में लगातार टिप्पणीकार मौजूदा संकट का स्मरण 1991 के संकट के रूप में कर रहे हैं, जब पी वी नरसिंहराव के नेतृत्व वाली सरकार को भारत के 67 टन स्वर्ण भंडार के बदले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 2.2 अरब डॉलर आपात कर्ज लेना पडा था.
आडवाणी ने उन मीडिया खबरों का हवाला भी दिया है, जिनमें कहा गया है कि सरकार तिरुपति, शिरडी, सिद्धिविनायक और पदमनाभस्वामी जैसे भारी मात्रा में स्वर्ण भंडार वाले मंदिरों के सोने को नकदी में बदलने के लिए उनसे संपर्क करने का इरादा कर रही है. आडवाणी ने स्मरण किया कि अर्थव्यवस्था को सुधारने और रुपये में गिरावट को रोकने में सरकार के विफल रहने के बारे में शिकायत करने के लिए पिछले सप्ताह बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि मुखर्जी सरकार को जल्द से जल्द नया जनादेश हासिल करने की सलाह दें.