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UP चीनी मिल घोटाला: मायावती के करीबी अफसर सहित 14 ठिकानों पर CBI रेड

चीनी मिल बिक्री घोटाले के मामले में यूपी की पूर्व सीएम मायावती के पूर्व मुख्य सचिव नेतराम के आवास सहित 14 स्थानों पर छापे मारे हैं. सीबीआई ने मंगलवार को यह छापे इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए डाले.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथि‍त चीनी मिल बिक्री घोटाले के मामले में यूपी की पूर्व सीएम मायावती के पूर्व मुख्य सचिव नेतराम के आवास सहित 14 स्थानों पर छापे मारे हैं. सीबीआई ने मंगलवार को यह छापे इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए डाले.

गौरतलब है कि बसपा सुप्रीमो मायावती के यूपी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान यूपी के 21 चीनी मिलों को निजी कंपनियों को बेचा गया था. लोकसभा चुनाव से पहले इसी साल 25 अप्रैल को सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की थी. इस प्रक्रिया में सात चीनी मिलों को बंद कर दिया गया था. सीबीआई के एफआईआर के मुताबिक साल 2010-11 के दौरान 11 चीनी मिलों को बेचा गया था. मायावती साल 2007 से 2012 तक यूपी की मुख्यमंत्री थीं.

आरोप है कि चीनी मिलों की गलत बिक्री से करीब 1179 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सीबीआई जांच में ये बात सामने आई थी कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग का भी है. जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है.

सीबीआई के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया कि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के लखनऊ के गोमती नगर के आवास के अलावा एक अन्य रिटायर्ड आईएएस विनय प्रिय दुबे के लखनऊ के अलीगंज स्थ‍ित आवास पर भी छापे डाले गए. चीनी मिलों की बिक्री घोटाले के दौरान नेतराम कृषि विभाग में प्रमुख सचिव थे और उनके पास आबकारी, गन्ना, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का भी जिम्मा था. विनय दुबे उस समय यूपी स्टेट शुगर कॉरपोरेशन में एमडी थे.

सहारनपुर के पूर्व एमएलसी इकबाल सिंह के दो बेटों के आवास पर भी छापा डाला गया. इसके अलावा इस सिलसिले में चार्टर्ड एकाउंटेंट एस.के. गुप्ता के दिल्ली स्थ‍ित बारखम्भा रोड और ग्रेटर कैलाश के ठिकानों पर छापा डाला गया. इस मामले के एक और मुख्य आरोपी सौरभ मुकंद के सहारनपुर स्थ‍ित आवास पर भी छापा डाला गया.

सीबीआई के एफआईआर में दिल्ली के रोहिणी निवासी, राकेश शर्मा और उनकी पत्नी सुमन शर्मा, इंदिरापुरम गाजियाबाद के धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर के मुकंद, जावेद, मोहम्मद नसीम अहमद और मोहम्मद वाजिद का नाम भी शामिल है.

लोकसभा चुनाव के बीच मायावती राज में बेची गई चीनी मिलों का केस अब प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में भी आ गया है. प्रवर्तन निदेशालय अब इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करेगा. मामले की जांच कर रही सीबीआई को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दस्तावेज मिले थे, जो ईडी को सौंप दिए गए हैं.

क्या था पूरा मामला

आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी बैलेंस शीट और निवेश के फर्जी कागजातों के आधार पर नीलामी में शामिल होने के लिए योग्य मान लिया. इस तरह ज्यादातर चीनी मिलें इस कंपनी को औने-पौने दामों में बेच दी गई. इस कंपनी का नाम नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड है. जिस वक्त ये चीनी मिल नम्रता कंपनी को बेची गई थीं, उस वक्त यूपी में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी और मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं.

सीबीआई के मुताबिक देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज, हरदोई, रामकोला, छितौनी और बाराबंकी की सात चीनी मिलों को खरीदने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.

साल 2017 में यूपी में भारतीय जनता पार्टी की सरकार की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल 2018 में चीनी मिल बेचे जाने के केस की सीबीआई जांच करने की सिफारिश की थी. योगी सरकार की सिफारिश के बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. शुरूआती जांच में ही इस मामले में गड़बड़ी की बात सामने आई थी.

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