राहुल गांधी की फटकार के बाद भी उत्तर प्रदेश से चुने गये केंद्रीय मंत्री सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मंत्री ज्यादातर समय दिल्ली में बिताते हैं और कार्यकर्ताओं के काम नहीं करते. इसके बाद राहुल गांधी ने सारे मंत्रियों को महीने में कम से कम दो बार अलग-अलग इलाकों का दौरा करने को कहा है.
राहुल गांधी खुद तो अपने रायबरेली और अमेठी क्षेत्र में घूम-घूम कर लोगों का हाल पूछ रहे हैं लेकिन जिन मंत्रियों को राहुल ने दिल्ली में सत्ता सौंपी वो उसी में खो गये. पार्टी के यूपी प्रभारी मघुसूदन मिस्त्री ने राज्य का दौरा कर एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें साफ कहा गया है कि मंत्री लोगों के काम नहीं करते.
इस रिपोर्ट के हिसाब से मंत्री ज्यादातर समय दिल्ली में बिताते हैं और राज्य का दौरा नहीं करते. मंत्री सिर्फ वहीं जाते हैं जहां से चुन कर आये हैं, राज्य के बाकी हिस्सों में नहीं. कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि मंत्री काम नहीं करते, करते भी हैं तो सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र से. दिल्ली में मंत्रियों के घर पर जाने पर अच्छा व्यवहार नहीं होता, कई बार तो घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिलते.
इस रिपोर्ट को लेकर राहुल गांधी नाराज हैं, उन्होंने मंत्रियों की क्लास भी लगाई. अब सभी मंत्रियों को अलग-अलग जोन में कम से कम दस जिलों का प्रभार सौंपा जाएगा, जहां वो एक-एक जिले में दो-दो दिन बिता कर कार्यकर्ताओं की समस्याओं का निदान करेंगे.
उत्तर प्रदेश से केंद्रीय मंत्री के तौर सलमान खुर्शीद क्षेत्र का बहुत कम दौरा करते हैं. या तो दिल्ली में रहते हैं या विदेशों में, लोगों से बहुत कम मिलते हैं.
श्री प्रकाश जायसवाल केवल कानपुर का ही दौरा करते हैं, कहीं और का नहीं. काम सिर्फ अपने इलाके के लोगों का ही करते हैं और प्रदेश के बाकी इलाकों के लोगों के नहीं.
बेनी प्रसाद वर्मा जो कि पुराने समाजवादियों के ही काम करते हैं. बेनी बाबू का कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ज्यादा लगाव नहीं, और वो सिर्फ अपने इलाके का ही दौरा करते हैं.
राज्य मंत्रियों में पर नजर डालें तो
प्रदीप जैन आदित्य से कार्यकर्ता काम ना होने से नाराज हैं. जैन अपने कुछ चहेतों को बढ़ावा देते हैं. सिर्फ अपने इलाके का ही दौरा करते हैं.
आरपीएन सिंह, राज्य का कम दौरा करते हैं. कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि उनके काम नहीं करते. जितिन प्रसाद अपने ही इलाके पर ध्यान देते हैं. दूसरे इलाकों के कार्यकर्ताओं के काम कम करते हैं, मिलते हैं लेकिन काम नहीं होता. इसके बाद भी विधानसभा चुनाव में पार्टी की हालत पतली हो गई थी. अब राहुल ने सबको काम पर लगा दिया है.
मिस्त्री की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि मंत्री ही नहीं सांसदों को लेकर भी लोगों की कई शिकायतें हैं. अगर समय रहते ये नहीं सुधरे तो लेने के देने पड़ सकते हैं. उत्तर प्रदेश से पिछली बार 21 सांसद जीते थे. इनके चलते पार्टी को अच्छी बढ़त मिली थी.
दरअसल राहुल चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में कम से कम 22 का आंकड़ा तो बना रहे लेकिन असल सवाल यही है कि राहुल को इतनी देर से ये सब याद क्यों आ रहा है कि मंत्री काम नहीं करते जबकि ये शिकायत तो चार साल पुरानी हैं.