सुप्रीम कोर्ट ने बिनब्याही मां के बच्चे की गार्जियनशिप पर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि बिनब्याही मां को बच्चे की गार्जियनशिप लेने के लिए पिता की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.
जस्टिस विक्रमजीत सेन की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. उन्होंने कहा है कि इस मामले में बच्चे के हित में यह जरूरी है कि उसके पिता को नोटिस देने की आवश्यकता से छुटकारा दिया जाए.
महिला ने दिए ये तर्क
एक महिला ने बच्चे का लीगल गार्जियन बनने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बच्चे के पिता को शामिल किए जाने की कानूनी बाध्यता को चुनौती दी थी. महिला का तर्क था कि जिससे उसने शादी ही नहीं की और न ही पिता को बच्चे के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी है, तो उससे फिर मंजूरी क्यों ली जाए. महिला का तर्क था कि पिता का बच्चे की परवरिश से कोई सरोकार नहीं ऐसे में उसका नाम या उसकी मंजूरी कोई मायने नहीं रखती.
बढ़ सकती है मुश्किल
कानून के मुताबिक गार्जियन-वार्ड्स एक्ट और हिंदू माइनोरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट के तहत बच्चे के लीगल गार्जियन का फैसला करते वक्त उसके पिता की सहमति लेना जरूरी होता है. याचिकाकर्ता महिला ने सुप्रीम कोर्ट में इस प्रावधान को चुनौती दी थी. दिल्ली के ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने महिला के खिलाफ फैसला सुनाया जिसके बाद महिला ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सोमवार को फैसला सुनाया गया है.