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शिवसेना ने मोदी के पाकिस्तान दौरे पर साधा निशाना, कहा- वाजपेयी, आडवाणी जैसा ना हो जाए हाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक पाकिस्तान जाकर वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने की चारों तरफ प्रशंसा की जा रही है. खुद बीजेपी ने इसको सराहा है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सवाल किया है कि अगर कांग्रेस का कोई प्रधानमंत्री इस तरह पाकिस्तान जाता तो क्या उस वक्त भी बीजेपी स्वागत करती?

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मोदी के पाक दौरे उद्धव ने साधा निशाना मोदी के पाक दौरे उद्धव ने साधा निशाना

महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ गठबंधन में सरकार बनाने वाली शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक पाकिस्तान जाने से बौखला गए हैं. शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में ठाकरे का एक लेख छपा है, जिसमें मोदी की पाक यात्रा को आड़े हाथों लिया गया है.

मोदी का 'मास्टर स्ट्रोक'
शिवसेना प्रमुख ने कहा कि मॉस्को और काबुल की यात्रा से लौटते वक्त मोदी का अचानक पाक जाना किसी मास्टर स्ट्रोक से कम नहीं है. सामना के लेख में कहा गया है, 'मॉस्को, काबुल की यात्रा करते हुए मोदी के हवाई जहाज ने अचानक लाहौर की ओर मुड़कर राजनीतिक 'मास्टर स्ट्रोक' मारा है, ऐसी चर्चा शुरू है. धुरंधर राजनीतिज्ञ होने के कारण मोदी इस तरह के साहसी निर्णय ले सकते हैं, ऐसा कहा जा रहा है.'

शरीफ भी आएं भारत तो हैरानी नहीं
सामना में छपे लेख में कहा गया है कि मोदी ने शरीफ को न सिर्फ जन्मदिन की शुभकामनाएं दी बल्कि उनके घर जाकर उनकी पोती की शादी में शामिल भी हुए. बुजुर्ग मां को झुककर नमस्कार किया. ऐसा बहुत कुछ अचानक घटित हुआ और मोदी एक बार फिर दिल्ली वापस लौट आए. अब मोदी के जन्मदिन के अवसर पर अगर नवाज शरीफ भी अचानक दिल्ली आ जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

तो क्या बीजेपी करती स्वागत?
सामना में पूछा गया है कि अगर कांग्रेस का कोई प्रधानमंत्री इस तरह पाकिस्तान जाता तो क्या बीजेपी उस वक्त भी ऐसे कदम का स्वागत करती? उद्धव ने कहा कि मोदी पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए जिसल तरह के प्रयास कर रहे हैं, वो प्रशंसनीय है लेकिन अगर इस तरह की कोशिश में कांग्रेस का कोई प्रधानमंत्री वहां जाता तो क्या बीजेपी उसका जोरदार स्वागत करती? उद्धव ने कहा कि ये सवाल पूरे देश के मन में चल रहा है.

आडवाणी और वाजपेयी जैसा न हो जाए हाल
शिवसेना ने पाकिस्तान की जमीं को शापित बताया है. मुखपत्र में कहा गया है कि अभी तक भारत के लिए जिस नेता ने पाकिस्तान से दूरियां पाटने की कोशिश की है, उसका राजनीतिक करियर अंधेरे की ओर चला गया है. सामना में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण दिया गया है. लेख में लिखा है, 'श्री लालकृष्ण आडवाणी 'जिन्ना' की कब्र पर जाकर उनका गुणगान कर आए और उनकी राजनीति का ग्राफ गिरने लगा और आज वो अलग-थलग पड़े हैं. वाजपेयी ने पाकिस्तान से रिश्ता सुधारने के लिए मन से 'लाहौर बस' छोड़ने से लेकर आगे आगरा में जनरल मुशर्रफ से मुलाकात करने का श्रम किया लेकिन उसके बाद वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार फिर सत्ता में नहीं आ सकी. पाकिस्तान की भूमी इस तरह की शापित है.'

पाक की जमीन पर बहा मासूमों का खून
सामना ने कहा कि पाकिस्तान की जमीन इसलिए शापित है क्योंकि वहां लाखों मासूमों का खून बहा है. मोदी-शरीफ मुलाकात से दो देशों के बीच का तनाव पिघलकर नए पर्व का शुभारंभ होनेवाला होगा तो यह किसे नहीं चाहिए. सिर्फ मोदी भी वाजपेयी की तरह धोखा न खाएं, यही हमारी ईश्वर चरणों में प्रार्थना है.

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