आंध्र प्रदेश के चित्तूर में चंदन तस्करों और पुलिस के बीच हुए कथित मुठभेड़ के मामले में एक नया मोड़ आ गया है. आजतक के पास मौजूद कॉल डिटेल से साबित हो रहा है कि 6 अप्रैल को स्पेशल टॉस्क फोर्स और फॉरेस्ट गार्ड द्वारा तस्करों को सुनियोजित तरीके से जंगल ले जाया गया था. इस घटना के तीन प्रत्यक्षदर्शियों ने नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन से यह बात कही थी.
कॉल रिकॉर्ड से यह भी साबित हो रहा है कि मुठभेड़ के एक दिन पहले से ही अधिकांश चंदन तस्करों के फोन स्वीच ऑफ थे. मारे गए तस्करों के परिवार वालों ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए न्याय की मांग की है. राजनीतिक पार्टियों ने भी इसकी सीबीआई जांच की मांग की है.
बताते चलें कि लाल चंदन तस्करों के खिलाफ कथित पुलिस अभियान के दौरान हुई गोलीबारी में 20 लोग मारे गए थे. घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन ने आंध्र प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था. आयोग ने कहा था कि यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. गोलीबारी को आत्मरक्षा के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता.