अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान स्थित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अल-कायदा की ताकत बढ़ाने का स्रोत है जो अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है और पाकिस्तान की सरकार को गिराना चाहता है.
आतंकवाद निरोधी मामलों से संबंधित दूत डेनियल बेंजामिन ने कहा, ‘अमेरिका को जिस आतंकवादी संगठन से सबसे ज्यादा खतरा है, टीटीपी उसका एक अहम भाग है. टीटीपी और अल-कायदा के बीच गहरा संबंध है. टीटीपी को अल-कायदा से वैचारिक मार्गदर्शन मिलता है, वहीं अल-कायदा को पश्तून इलाके में सुरक्षित पनाह के लिए टीटीपी की जरूरत है.’
वाशिंगटन ने टीटीपी को विदेशी आतंकवादी संगठनों (एफटीओ) की सूची में डाल दिया, जिसके बाद अब इसके नेताओं की विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध लग सकेगा.
उन्होंने विदेश मंत्रालय के एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, ‘इस आपसी सहयोग से टीटीपी को अल-कायदा के वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क तक पहुंच और उसके सदस्यों को आतंकवादी अभियानों का अनुभव मिलता है. दोनों गुटों की नजदीकी और उनके संबंधों की प्रवृत्ति देखते हुए कहा जा सकता है कि टीटीपी अल-कायदा की ताकत बढ़ाने वाला गुट है.’
एक सवाल के जवाब में बेंजामिन ने कहा कि टीटीपी के हजारों सदस्य हैं.