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2002 के गुजरात दंगों का सच

आज तक और तहलका ने 2002 के गुजरात दंगों का सच उजागर किया. ऑपरेशन कलंक नामक स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया कि दंगे आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल के सुनियोजित साजिश के परिणाम थे.

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आज तक टीवी चैनल और तहलका पत्निका ने ऑपरेशन कलंक नाम के एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए 2002 के गुजरात दंगों के सच को सबके सामने ला दिया. सब जानते हैं कि 2002 के गुजरात दंगों में मुसलमानों की हत्याओं की साजिश आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल ने रची थी और इसकी पूरी जानकारी मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को थी. लेकिन मोदी बहुत ही खूबी के साथ अपने को इस दाग से बचाए हुए थे. लेकिन आज तक टीवी चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन में संघ के नेताओं को यह बोलते हुए दिखाया कि मोदी ने उन्हें तीन दिन की खुली छूट दी थी.

ऑपरेशन कलंक में दिखाया गया कि दंगे आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल के बड़े नेताओं द्वारा रची गई सुनियोजित साजिश का परिणाम थे और इसकी मोदी को न सिर्फ जानकारी थी बल्कि इसके लिए उनकी (नरेंद्र मोदी) सहमति भी थी.

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स्टिंग ऑपरेशन में ऐसे लोग दिखाए गए - जो दिख तो निश्चित ही मनुष्यों की तरह रहे थे लेकिन गुजरात नरसंहार को लेकर उनकी बर्बरता के किस्से रोंगटे खड़े कर देने वाले थे. वे बता रहे थे कि किस तरह उन्होंने एक गर्भवती महिला का पेट चीरकर अजन्मे बच्चे को मसल दिया. वे यह गर्वपूर्वक बता रहे थे कि किस तरह कांग्रेस के सांसद रहे एहसान जाफरी का तबीयत के साथ कत्ल किया गया. दरिंदगी की यह दास्तान बताने वाला और कोई नहीं बजरंगदल का कार्यकर्ता बाबू बजरंगी है, जो यह भी बता रहा था कि उसे यह सब करते हुए खुद के महाराणा प्रताप होने सा अनुभव हो रहा था.

इस खुलासे पर बीजेपी ने कहा है कि तहलका कांग्रेस की डिटेक्टिव एजेंसी की तरह काम कर रही है. यह असेंबली चुनाव से पहले के कांग्रेसी हथकंडे का एक नमूना है. जबकि कांग्रेस ने इस खुलासे को लोकतंत्र पर एक बदनुमा दाग बताते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार को भी इसके लिए बराबर का जिम्मेदार ठहराया.

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