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तीन तलाक बिल के पास होने का आज रास्ता साफ, सरकार को मिला 'हाथ' का साथ!

भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को 28 और 29 दिसंबर के लिए व्हिप जारी कर दिया है. दोनों दिन सांसदों को लोकसभा में उपस्थित होने के लिए कहा गया है. वहीं आज सुबह बीजेपी ने संसदीय दल की बैठक भी बुलाई है.

मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा तीन तलाक से छुटकारा मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा तीन तलाक से छुटकारा

मुसलमानों के बीच तीन तलाक के चलन को समाप्त करने के प्रस्ताव वाला विधेयक आज लोकसभा में पेश किया जाएगा. लोकसभा की कार्यसूची के मुताबिक, तीन तलाक से संबंधित मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 निचले सदन में 28 दिसंबर को पेश किया जाएगा. वैसे सरकार के लिए अच्छी खबर ये है कि बिल का कांग्रेस ने भी समर्थन किया है.

BJP सांसदों को व्हिप जारी

भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को 28 और 29 दिसंबर के लिए व्हिप जारी कर दिया है. दोनों दिन सांसदों को लोकसभा में उपस्थित होने के लिए कहा गया है. वहीं आज सुबह बीजेपी ने संसदीय दल की बैठक भी बुलाई है.

कांग्रेस बिल के समर्थन में

वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस सरकारी बिल का संसद में साथ दे सकती है. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में बुधवार देर रात कांग्रेसियों इस मुद्दे पर बैठक की. सूत्रों के मुताबिक बैठक में तीन तलाक बिल के पक्ष में कांग्रेस दिखी. ऐसे में मुमकिन है कि इस बिल को पास करवाने में केंद्र सरकार को कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए.

दरअसल तीन तलाक विधेयक को गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाले अंतर मंत्रीस्तरीय समूह ने तैयार किया है जिसमें मौखिक, लिखित या एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिये किसी भी रूप में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को अवैध करार देने और पति को तीन साल के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है.

इस विधेयक को इस महीने ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी. यह विधेयक पिछले हफ्ते पेश किया जाना था लेकिन संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं से कहा था कि इसे अगले सप्ताह पेश किया जाएगा.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को सरकारी बिल नापसंद

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस बिल को महिला विरोधी बताया है. बीते रविवार को लखनऊ में इस संबंध में पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी की बैठक हुई. इस बैठक में तीन तलाक पर प्रस्तावित बिल को लेकर चर्चा की गई. कई घंटों चली बैठक के बाद बोर्ड ने इस बिल को खारिज करने का निर्णय लिया.

इतना ही नहीं ट्रिपल तलाक पर लाए जा रहे इस बिल को बोर्ड ने महिला विरोधी बताया है. साथ ही तीन साल की सजा देने वाले प्रस्तावित मसौदे को क्रिमिनल एक्ट करार दिया है. बोर्ड की मीटिंग में तीन तलाक पर कानून को महिलाओं की आजादी में दखल कहा गया है.

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