पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय पर हमला करने वाले तालिबान और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित संगठनों के आतंकवादियों का इरादा बंधकों को छोड़ने के बदले 100 से अधिक गिरफ्तार आतंकियों को रिहा करवाने का था.
सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने कहा कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-झांगवी के 10 आतंकवादियों के समूह ने गत शनिवार इस हमले को अंजाम दिया था. अब्बास ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘उनका मकसद (रावलपिंडी में) सैन्य मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को बंधक बनाना और फिर अपनी मांगें रखना था. उनकी मुख्य मांग 100 से अधिक आतंकवादियों की सूची (उनकी रिहाई) के बारे में थी जिनमें विभिन्न संगठनों के उच्चस्तरीय नेता शामिल थे जो सरकार की हिरासत में हैं.’’
शनिवार दोपहर जहां पांच आतंकवादियों को मुख्यालय के बाहर स्थित जांच चौकी के निकट मार गिराया गया, वहीं चार अन्य की तब मौत हो गयी जब विशिष्ट सेवा समूह के कमांडो ने 39 बंधकों को मुक्त कराने के लिए रविवार को अभियान शुरू किया.