तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) के जो चार राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं, उनमें से दो के खिलाफ सीबीआई, आयकर और ईडी की जांच चल रही है. पिछले साल बीजेपी ने राज्यसभा की एथिक्स कमेटी से शिकायत कर दोनों सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी. मगर अब, वही दोनों सांसद भाजपाई बन गए है. इन सांसदों के नाम हैं वाईएस चौधरी और सीएम रमेश. टीडीपी से बीजेपी में शामिल होने वाले अन्य दो राज्यसभा सांसदों के नाम हैं जीएम राव और टीजी वेंकटेश. इस प्रकार टीडीपी के पास अब सिर्फ दो राज्यसभा सांसद ही बचे हैं.
दरअसल, बीजेपी के राज्यसभा सांसद और पार्टी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हन ने 28 नवंबर, 2018 को राज्यसभा की एथिक्स कमेटी के चेयरमैन नारायण लाल पंचारिया पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने टीडीपी सांसद सीएम रमेश और वाईएस चौधरी को आंध्र प्रदेश का 'माल्या' ठहराते हुए अयोग्य ठहराने की मांग की थी. राज्यसभा की आचार समिति को लिखे इस पत्र में बीजेपी सांसद ने टीडीपी के दोनों सांसदों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे.
वहीं वाईएस चौधरी के खिलाफ भी बीजेपी सांसद ने कई गंभीर आरोप लगाए थे. कहा था कि चौधरी ने कई पब्लिक बैंकों को चूना लगाया. उनकी कंपनी ने बैंकों से 5,700 करोड़ लेकर शेल कंपनियों में डाल दिए. जीवीएल नरसिम्हा राव ने पत्र में कहा था कि दोनों के सांसद बने रहने से संसद नामक संस्था की गरिमा को गंभीर नुकसान होगा. वैसे भी विजय माल्या के आचरण के बाद से राज्यसभा की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है. जीवीएल नरसिम्हन ने पत्र में यह भी कहा था कि राज्यसभा की एथिक्स कमेटी का दायित्व है कि वह सांसदों के सही आचरण को सुनिश्चित करे. उन्होंने वाईएस चौधरी के राज्यसभा की एथिक्स कमेटी में मेंबर के रूप में शामिल होने पर भी हैरानी जताई थी.I've complained to Ethics Committee to seek disqalification of two
TDP MPs, Y.S.Choudary & C.M.Ramesh who have earned the dubious title of "Andhra Mallyas" with massive financial scandals. defrauded banks for 5700 Cr & evaded hundreds of crores in taxes.
— GVL Narasimha Rao (@GVLNRAO)
क्या जांच एजेंसियों से मिलेगी राहत?
टीडीपी छोड़कर दोनों राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने के पीछे उनके खिलाफ चल रही जांचों से राहत मिलने की मंशा बताई जा रही है. बैंक लोन और कंपनियों से जुड़े फ्रॉड के आरोप में दोनों सांसदों के खिलाफ सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी आदि एजेंसियां जांच कर रहीं हैं. सियासी गलियारे में चर्चा है कि क्या केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी में शामिल होने के बाद सांसदों को जांच एजेंसियों से किसी तरह की राहत मिलेगी?