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SC का आदेश, NEET-1 दे चुके छात्र फिर से दे सकेंगे परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'NEET-1 की परीक्षा दे चुके जो छात्र ये समझते हैं कि उन्‍हें अपनी परीक्षा क्षेत्रीय भाषा की बजाय अंग्रेजी में देने के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिला और वे सही से तैयारी नहीं कर पाए हैं, तो ऐसे छात्र NEET-2 की परीक्षा दे सकते हैं.

अलग से परीक्षा नहीं करा पाएंगे राज्य अलग से परीक्षा नहीं करा पाएंगे राज्य

देशभर में एमबीबीएस के अलावा दूसरे मेडिकल कोर्सों में दाखिला लेने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत वाली खबर है. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल एलिजिबिटी इंटरेस्ट टेस्ट यानी NEET-1 की परीक्षा दे चुके छात्रों को भी कुछ शर्तों के साथ NEET-2 में बैठने की इजाजत दे दी है. सोमवार को जस्टिस एआर दवे की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया. राज्यों की अर्जी को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्‍यों को अपनी अलग से परीक्षा लेने की इजाजत नहीं दी.

NEET-2 के आधार पर ही होंगे दाखिले
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'NEET-1 की परीक्षा दे चुके जो छात्र ये समझते हैं कि उन्‍हें अपनी परीक्षा क्षेत्रीय भाषा की बजाय अंग्रेजी में देने के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिला और वे सही से तैयारी नहीं कर पाए हैं, तो ऐसे छात्र NEET-2 की परीक्षा दे सकते हैं. ऐसे छात्रों को अपने आवेदन के वक्त पहले दी जा चुकी NEET-1 परीक्षा की उम्‍मीदवारी को छोड़नी होगी. NEET-2 की परीक्षा के आधार पर उनका चयन हो सकेगा और दाखिले लिए जाएंगे.

अलग से परीक्षा नहीं करा पाएंगे राज्य
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि जो छात्र आवेदन करने के बावजूद किसी वजह से NEET-1 की परीक्षा देने से चूक गए, वो भी NEET-2 की परीक्षा दे सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्‍यों को अलग से क्षेत्रीय भाषाओं में मेडिकल दाखिला प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. राज्‍यों की ओर से दलील दी गई थी कि उन्‍हें अपनी परीक्षा लेने की अनुमति दी जाए. कोर्ट ने कहा कि जब केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा ली जा रही है, तो अलग से परीक्षा कराने कोई मतलब नहीं है. कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया है कि एमबीबीएस या बीडीएस की पढ़ाई के लिए किसी निजी कॉलेज या एसोसिएशन या किसी निजी, डीम्ड विश्वविद्यालय को कोई परीक्षा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में फिर क्यों आया NEET मामला
प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस के लिए NEET के तहत परीक्षा लिए जाने के फैसले में बदलाव की मांग को लेकर महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक के अलावा कई अन्‍य राज्‍यों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. सुप्रीम कोर्ट में कई राज्‍यों की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया है कि उन पर NEET थोपा नहीं जा सकता, क्‍योंकि उनके यहां पर पहले से तय परीक्षा नीति सिर्फ मेडिकल कोर्सों में ही दाखिले के लिए नहीं है, बल्‍कि कई अन्‍य कोर्सों के लिए भी ली जाती है, जो मेडिकल से संबंधित हैं.

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