के मामले में सवाल पूछे जाने पर कांग्रेस नेता शशि थरूर इस कदर भड़के कि उन्होंने मीडिया को 'झूठा और गिरा हुआ' बता डाला. बाद में ट्वीट करके भी उन्होंने मीडिया के लिए बुरे शब्दों का इस्तेमाल किया.
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'गिरे हुए चैनल मुझ पर सवालों से बचने का इल्जाम लगा रहे हैं. मैं पुलिस और जांचकर्ताओं से बात करता हूं, स्वयंभू विजिलेंट झूठों से नहीं. मैंने उन्हें यह बता दिया.'
Shashi Tharoor on being asked about Sunanda Pushkar case
— ANI (@ANI_news)
Scummy channel accuses me of evading questions. I speak to the police &investigators, not to self-appointed vigilante liars. Told them so.
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor)
These vile people have sunk so low today in their venal desire to profit from a personal tragedy that my 17month-old silence finally cracked
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor)
I let myself down by shouting in fury at a badgering hack whom i had often been kind to. Won't again. I regret giving them the satisfaction.
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor)
दरअसल बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस को सुनंदा पुष्कर हत्या मामले में तीन संदिग्धों का दी थी. जब इस पर थरूर की प्रतिक्रिया मांगी गई तो वह भड़क उठे.
इससे पहले कोर्ट ने संदिग्धों की ओर से यह टेस्ट कराने की रजामंदी देने के बाद अदालत ने जांचकर्ताओं को इजाजत दी. तीन संदिग्धों, शशि थरूर के घर काम करने वाले नारायण सिंह, ड्राइवर बजरंगी और मित्र संजय दीवान ने अदालत से कहा कि वे पॉलीग्राफ टेस्ट से गुजरना चाहते हैं. अदालत ने शर्त रखी कि टेस्ट की प्रक्रिया में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन किया जाए.दिशानिर्देशों में कई अन्य बातों के साथ यह भी शामिल है कि टेस्ट का सामना कर रहे लोगों का वकील वहां मौजूद होना चाहिए. इस मामले के संबंध में इससे पहले तीन अन्य लोगों एसके शर्मा, विकास अहलावत और सुनील टकरू का लाई डिटेक्टर टेस्ट हो चुका है. इस मामले में थरूर से अब तक तीन बार पूछताछ हो चुकी है.
सुनंदा पिछले साल 17 जनवरी को एक होटल के कमरे में मृत मिली थीं. सुनवाई के दौरान, पुलिस ने अदालत से कहा कि जांच के दौरान इन तीनों से पूछताछ हुई लेकिन वे कुछ अहम तथ्य छिपा रहे हैं. पुलिस ने दावा किया, वे सभी तथ्यों का खुलासा नहीं कर रहे हैं. वे सुनंदा पुष्कर के शव की चोटों से संबंधित कुछ अहम तथ्यों को छिपा रहे हैं.