दुनिया भर में रेलवे के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और तरीकों को जानने के लिए भारतीय रेलवे ने ग्लोबल टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस बुलाई है. यह कांफ्रेंस 2 दिनों के लिए 3 मई और 4 मई को राजधानी दिल्ली में आयोजित की जा रही है. इसको आयोजित करने का जिम्मा रेलवे डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन यानी आरडीएसओ को सौंपा गया है. इस कांफ्रेंस में 17 देशों के डेढ़ सौ जाने-माने रेल विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं. इसमें दुनिया भर की अत्याधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया जाएगा.
आरडीएसओ के महानिदेशक और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आर.के. कुलश्रेष्ठ ने इस कांफ्रेंस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यहां आने वाले दिनों में रेल यातायात की योजना और रेल आधारित उद्योगों के लिए ये कान्फ्रेंस एक अच्छा मौका है. इस सम्मेलन में रेलवे के चार प्रमुख क्षेत्रों– सेफ्टी, सिक्योरिटी, क्षमता विस्तार और ग्राहक सेवा में, भविष्य में रेल परिवहन विकास के लिए योजना बनाने में, लेटेस्ट तकनीक को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा.
नए तकनीकी बदलावों को भारतीय रेलवे के लिए अनुकूल बनाने के लिए आरडीएसओ ने भारतीय रेलवे तकनीकी संस्थान अर्थात इंस्टीट्यूट ऑफ रोलिंग स्टॉआक इंजीनियर्स (आईआरएसई) और इंस्टीट्यूशन ऑफ सिग्नल एण्ड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स (आईआरएसई) के साथ मिलकर इस सम्मेलन का आयोजन किया है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु 3 मई को इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे.
इस सम्मेलन में तकनीकी सत्रों, तकनीकी प्रस्तुतियों, टेबल-टॉप सामग्री के अलावा अनेक उद्योगों की नेटवर्किंग के लिए भी खास अवसर उपलब्ध कराए जाऐंगे. इस कांफ्रेंस में मैग्लेव ट्रेन, हाइपरलूप टेक्नोलॉजी और बुलेट ट्रेन से संबंधित विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं. इस कॉन्फ्रेंस में भारतीय रेलवे व इसके सार्वजनिक उपक्रमों पर अपनाए जाने के लिए दुनिया भर में मौजूद उपयुक्त और श्रेष्ठ तकनीक की पहचान करने पर बात की जाएगी. सम्मेलन में अमेरिका, चीन, जापान, रूस, दक्षिण अफ्रीका इत्यादि 17 देशों के विशेषज्ञ भाग लेंगे.
इस ग्लोबल कांफ्रेंस में रेल फ्रैक्चर डिटेक्शन सिस्टम और रेजिड्यूअल स्ट्रेस मीजरमेंट ऑफ रेल, रेल के एनडीटी की स्वत: प्रणाली, ट्रैक फॉर्मेशन रिहाबिलिटेशन के लिए नवीनतम तकनीक, बेहतर एटी एंड एफबी वेल्डिंग तकनीकें, ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग, ओएचई की ऑनलाइन निगरानी और रेलगाड़ियों में हाउसकीपिंग में सुधार के लिए नवीनतम तकनीक जैसे 50 विषयों पर चर्चा होगी.
ऐसा अनुमान है कि भारतीय रेलवे के आला अफसर यहां पर प्रदर्शित की गई ग्लोबल टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने की कोशिश करेंगे और इसके आधार पर आने वाले दिनों में रेलवे के लिए मुफीद तकनीक को लाने की कोशिश करेंगे.