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बोफोर्स केस: BJP ने 'PAK कनेक्शन' पर कांग्रेस को घेरा, जासूस हर्शमैन के खुलासों पर मांगा जवाब

ईरानी ने हर्शमैन के इंटरव्यू के उस पार्ट का जिक्र किया जिसमें बोफोर्स मामले में पाकिस्तानी कनेक्शन होने की बात सामने आई है. स्मृति ईरानी ने बताया कि माइकल हर्शमैन ने ये भी दावा किया है कि उनको कई बार बोफोर्स पर घूस देने की कोशिश की गई और जान से मारने की भी धमकी दी गयी.

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स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी

बोफोर्स मामले में प्राइवेट जासूस माइकल हर्शमैन के खुलासे को लेकर स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर‍ निशाना साधा. मोदी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने टीवी चैनलों को दिए गए हर्शमैन के इंटरव्यू का हवाला देते हुए दावा किया कि दिवंगत कांग्रेस नेता राजीव गांधी की अगुवाई वाली सरकार ने उसकी बोफोर्स घोटाले की जांच में रोड़े अटकाए थे.

ईरानी ने कांग्रेस से पूछा कि हर्शमैन के दावे के अनुसार वह पाकिस्तानी ना‍गरिक कौन है, जिसने राजीव गांधी से मुलाकात की. उसके दिए ब्रीफकेस में क्या था. ईरानी ने कहा कि इन सवालों का जवाब कांग्रेस को देना चाहिए.

ईरानी ने हर्शमैन के इंटरव्यू के उस पार्ट का जिक्र किया जिसमें बोफोर्स मामले में पाकिस्तानी कनेक्शन होने की बात सामने आई है. स्मृति ईरानी ने बताया कि माइकल हर्शमैन ने ये भी दावा किया है कि उनको कई बार बोफोर्स पर घूस देने की कोशिश की गई और जान से मारने की भी धमकी दी गयी.

'वीपी सिंह ने जांच को कहा'

बीजेपी के केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि माइकल हर्शमैन ने दावा किया है कि उससे कॉन्टेक्ट उस समय के वित्त मंत्री वीपी सिंह ने किया. हर्शमैन के अनुसार वीपी सिंह उस समय कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों द्वारा किए जा रहे मनी लॉन्ड्र‍िंग के मामलों की जांच एक स्वतंत्र संस्था से करवाना चाहते थे.

बीजेपी के केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि निजी जासूसी एजेंसी फेयरफैक्स के अध्यक्ष हर्शमैन ने दावा किया है कि जब वह इस मामले में बैंकों की छानबीन कर रहे थे. उस समय जांच में BCCI बैंक ऑफ क्रेडिट एंड कॉमर्स इंटरनैशनल नाम के बैंक का खुलासा हुआ. इसे एक पाकिस्तानी फाइनेंसर ने 1972 में बनाया था. इंटरनेट में जानकारी के मुताबिक यह बैंक वित्त‍िय क्राइम और कालाधन से संबंध रखती थी.

'स्व‍िस बैंकों में जमा हो रहा था पैसा'

ईरानी ने बताया कि हर्शमैन ने दावा किया कि उनकी जांच में सामने आया कि स्विट्ज़रलैंड में कुछ बैंकों में जो धनराशी जमा की जा रही थी, यह धनराशी आर्म्स डील बोफोर्स में मिल रहे घूस का पैसा था. इस बात की जानकारी उसने वीपी‍ सिंह को दी. वीपी सिंह ने जांच जारी रखने को कहा था. हर्शमैन ने दावा किया कि यह बोफोर्स का पैसा था, इसका उनके पास सबूत है. हर्शमैन ने दावा किया कि भारत सरकार और सीबीआई के पास उस जांच से संबंधित जानकारी पहुंचाई थी.

स्मृति ने बताया कि हर्शमैन ने दावा किया कि उन्हें एक आर्म्स डीलर अदनान किशोगी के माध्यम से वीपी सिंह को फर्जी बैंक अकाउंट के माध्यम से फंसाने को भी कहा गया. ईरानी ने जानकारी दी कि हर्शमैन के अनुसार राजीव गांधी को इस जांच के बारे में BCCI के माध्यम से जानकारी मिली. वहीं जब सीबीआई ने BCCI के मुंबई ब्रांच पर रेड डालकर उसे बंद कर दिया. तब एक पाकिस्तानी व्यक्ति राजीव गांधी से एक बड़े ब्रीफकेस के साथ मिला और 24 घंटे के अंदर यह बैंक वापस खुल गया.

स्मृति ने बताया कि हर्शमैन ने यह दावा टीवी चैनल के साथ न्यूजपेपर में भी छपे इंटरव्यू में किया है. स्मृति ने कांग्रेस से उस पाकिस्तानी व्यक्ति का खुलासा करने, वीपी सिंह को क्यों फर्जी केस में फंसाने का प्रयास किया गया का जवाब देने की मांग की. स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रशासनिक इतिहास इस बात का गवाह है कि वह खुद भ्रष्टाचार करेंगे और जो लोग इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे उन्हें या तो धमकाया जाएगा या पैसों से मुंह बंद रखने की कोशिश होगी.

सीबीआई करेगी विचार

सीबीआई ने मंगलवार को कहा कि वह निजी जासूस माइकल हर्शमैन के दावों के अनुरूप बोफोर्स घोटाले के ‘‘तथ्यों एवं परिस्थितियों’’ पर विचार करेगी. सीबीआई के सूचना अधिकारी एवं प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने एक बयान में कहा, ‘‘एजेंसी को बोफोर्स से जुड़े मामले के बारे में कुछ टीवी चैनलों पर माइकल हर्शमैन के इंटरव्यू से पता चला.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इंटरव्यू में जिन तथ्यों एवं परिस्थितियों का जिक्र किया गया है, सीबीआई उचित प्रक्रिया के तहत उन पर विचार करेगी.’’ टीवी चैनलों ने हर्शमैन के हवाले से बताया था कि राजीव गांधी को जब ‘‘हमारे काम के बारे में पता चला’’ तो वह बहुत निराश हुए. इसके बाद उन्होंने एक न्यायिक आयोग का गठन किया ताकि तत्कालीन वित्त मंत्री वी पी सिंह की ओर से ‘फेयरफैक्स’ की सेवाएं लेने की परिस्थतियों की जांच की जा सके.

अपने इंटरव्यू में हर्शमैन ने 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स कमीशनखोरी स्कैंडल पर भारतीय एजेंसियों की मदद करने और गवाही देने की इच्छा जाहिर की, लेकिन यह भी कहा कि यह प्रयास भरोसेमंद होना चाहिए.

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