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राहत इंदौरीः वो शायर जो कहता था-मौत कल आती है आज आ जाए, डरता कौन है

राहत इंदौरी साहब की यह शानदार गजल दुनिया के उन लोगों के लिए संदेश है जो जीवन के सफर में कभी थक हार कर बैठना चाहते हैं अथवा संघर्ष को छोड़ देना चाहते हैं. राहत इंदौरी की ऐसी गजलें और शायरियां ऐसे लाखों लोगों के रक्त में स्फूर्ति पैदा करती रहेंगी.

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शायर राहत इंदौरी
शायर राहत इंदौरी

अपनी शायरी से जिंदादिली और मोहब्बत का पैगाम देने वाले मशहूर शायर राहत इंदौरी नहीं रहे. इंदौर के अरबिन्दो अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. राहत इंदौरी सोमवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

उन्होंने अपने आखिरी ट्वीट में खुद के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी देते हुए कहा था कि दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं, लेकिन नियति को शायद ये मंजूर नहीं था.

इसी ट्वीट में उन्होंने अपने वही शायराना अंदाज में कहा था कि 'एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी.' हालांकि राहत इंदौरी की खैरियत न मिली, वो इस दुनिया को छोड़कर चले गए, ये पैगाम जरूर आ गया.

राहत इंदौरी अपनी शायरियों और गजलों में बहुत पहले से ही जीवन की निरंतरता और मौत रूपी विराम का संदेश देते आए हैं. अपनी एक गजल में वो कहते हैं,

"राह में खतरे भी हैं, लेकिन ठहरता कौन है
मौत कल आती है, आज आ जाए डरता कौन है

सब ही अपनी तेजगामी के नशे में चूर हैं
लाख आवाजें लगा लीजे ठहरता कौन है

हैं परिंदों के लिए शादाब पेड़ों के हुजूम
अब मेरी टूटी हुई छत पर उतरता कौन है

तेरे लश्कर के मुकाबिल मैं अकेला हूं मगर
फैसला मैदान में होगा कि मरता कौन है.

राहत साहब की ये शानदार गजल दुनिया के उन लोगों के लिए संदेश है जो जीवन के सफर में कभी थक हार कर बैठना चाहते हैं अथवा संघर्ष को छोड़ देना चाहते हैं. राहत इंदौरी की ऐसी गजलें और शायरियां ऐसे लाखों लोगों के रक्त में स्फूर्ति पैदा करती रहेंगी.

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