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अलर्ट: एमपी, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के ट्राई जंक्शन पर नक्सली ट्रेनिंग कैंप

खुफिया सूत्रों से जो जानकारी मिली है कि बालाघाट और राजनादगांव के इलाकों में ऐसे अनेकों ट्रेनिंग कैंप चलाने की जानकारी मिली है जिसमें नक्सली भोले-भाले लोगों को बरगला कर उनको नक्सल ट्रेनिंग और हथियारों की ट्रेनिंग देने की कोशिश में जुटे हुए हैं.

प्रतीकात्मक फोटो ( Photo: aajtak) प्रतीकात्मक फोटो ( Photo: aajtak)

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल समस्या को लेकर केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें उन्होंने कहा है कि नक्सल ट्राई जंक्शन यानी मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बॉर्डर के खतरनाक जंगलों में नक्सली ट्रेनिंग कैंप चलाकर नक्सलियों को गुरिल्ला वॉर की ट्रेनिंग दे रहे हैं. इस रिपोर्ट के आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को इस इलाके में ज्यादा चौकसी बरतने और इस तरीके की ट्रेनिंग करने वाले इलाकों पर नजर रखने की हिदायत दी गई है.

आजतक को खुफिया सूत्रों से जो जानकारी मिली है कि बालाघाट और राजनादगांव के इलाकों में ऐसे अनेकों ट्रेनिंग कैंप चलाने की जानकारी मिली है जिस में नक्सली भोले भाले लोगों को बरगला कर उनको नक्सल ट्रेनिंग और हथियारों की ट्रेनिंग देने की कोशिश में जुटे हुए हैं.

बालाघाट और राजनांदगांव के बॉर्डर के 100 गांवों से 'जन मिलि‍शिया' बनाने की कोशिश

रिपोर्ट से इस बात की भी जानकारी मिल रही है कि नक्सली बालाघाट और राजनांदगांव के बॉर्डर के आस-पास मौजूद 100 गांव से जन मिलिशिया बनाने की फिराक में हैं. दरअसल,  जन मिलिशिया का इस्तेमाल नक्सली सुरक्षा बलों के खिलाफ इंटेलिजेंस यानी खुफिया जानकारी एकत्र करने और नक्सलियों के लिए बेसिक सपोर्ट मुहैया कराने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

लगातार सुरक्षाबलों के ऑपरेशन के चलते बॉर्डर के कई इलाकों में जन मिलि‍शिया या तो अपना काम छोड़ चुके थे या फिर अंडर ग्राउंड हो गए थे पर एक बार फिर नक्सली अपनी पैठ और अपने आप को मजबूत करने के लिए इस तरीके के जन मिलिशिया को खड़ा कर रहे हैं.

क्या होते हैं जन मिलि‍शिया ?

जन मिलिशिया नक्सलियों का वह एक हिस्सा है जो कि इनकी रीढ़ के तौर पर जाना जाता है. जन मिलिशिया को समाप्ति से यह समझा जाए कि नक्सलियों की रीढ़ खत्म हो गई है. सरकार इसको खत्म करने के लिए कई तरीके के कदम भी उठा रही है पर नक्सली कमांडर यह नहीं चाहते कि जन मिलिशिया खत्म हो.

जन मिलिशिया नक्सलियों का एक ऐसा हथियार है जो नक्सली कमांडरों के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करते हैं. यह नक्सलियों के समर्थक तो होते ही हैं साथ ही सुरक्षा बलों के खिलाफ नक्सलियों को गुप्त सूचनाएं भी देते हैं.  इसके अलावा नक्सलियों को हथियार पहुंचाने और उनकी हर तरीके से मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.

जन मिलिशिया की कमर तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने जो कदम उठाए हैं उससे इनकी कमर तो टूटी है जिसका परिणाम यह है कि अब नक्सली कमांडर और अधिक जन मिलिशिया को अपने गुट में शामिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं. इस साल सितंबर की शुरुआत तक 400 जन मिलि‍शिया और नक्सलियों ने सरेंडर किया.

हालांकि नक्सली इस समय काफी बैकफुट में हैं जिनके पास अब वैसे लड़ाके भी नहीं बचे हैं जो वेल ट्रेंड हो. सुरक्षा बल लगातार घने जंगलों में नक्सलियों को ढूंढने की कोशिश में लगे हुए हैं और उनके खिलाफ ऑपरेशन कर रहे हैं.

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल सितंबर की शुरुआत तक 9 राज्यों में 177 से ज्यादा नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने ढेर किया है इसके साथ साथ 1274 नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार भी किया है. मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 1 सितंबर 2018 तक 400 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर किया है.

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