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व्यंग्य: एप्स हैं बेहद जरूरी, ये 10 एप्स आपके जीवन की राह बनाएंगे आसान

मोबाइल बाजार में भांति-भांति के एप्लीकेशन उपलब्ध हैं. खांसी की दवा से लेकर बॉडी मास इंडेक्स बताने वाले हेल्थ एप्लीकेशन्स और चेहरे की बनावट के आधार पर चश्मे से लेकर कपड़े तक सुझाने वाले एप्लीकेशन हर किसी के मोबाइल पर दिख जाते हैं. समझिए कल की 'एन एप्पल अ डे ..' वाली अंग्रेजी कहावत बदलकर आज 'एन एप्लीकेशन एवरीडे..' हो चुकी है. फिर भी दसियों तरफ से बीसियों एप्लीकेशंस से घिरे होने के बावजूद कुछ खास एप्स की जरूरत हमें अब भी महसूस होती है.

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मोबाइल बाजार में भांति-भांति के एप्लीकेशन उपलब्ध हैं. खांसी की दवा से लेकर बॉडी मास इंडेक्स बताने वाले हेल्थ एप्लीकेशन्स और चेहरे की बनावट के आधार पर चश्मे से लेकर कपड़े तक सुझाने वाले एप्लीकेशन हर किसी के मोबाइल पर दिख जाते हैं. समझिए कल की 'एन एप्पल अ डे ..' वाली अंग्रेजी कहावत बदलकर आज 'एन एप्लीकेशन एवरीडे..' हो चुकी है. फिर भी दसियों तरफ से बीसियों एप्लीकेशंस से घिरे होने के बावजूद कुछ खास एप्स की जरूरत हमें अब भी महसूस होती है.

जानिए उन दस एप्स के बारे में जो हर किसी को अपने मोबाइल पर चाहिए...

1. सड़क सुरक्षा के लिए ऐप: ये ऐप उन तमाम लोगों की मदद के लिए डेवलप किया जाना चाहिए जो सड़क पर चलते वक्त नेट सर्फिंग या चैटिंग में मशगूल होते हैं. सामने खम्बे,गड्ढे या गाड़ी के आते ही इसमें अलर्ट बजना शुरू हो जाना चाहिए.

2. रिश्तेदारों के लिए ऐप: इस ऐप को भारतीय संस्कृति और सम्बन्धों के ज्ञान के आधार पर तैयार करना चाहिए ताकि ये स्वत: पता लगा सके कि कौन मिर्जापुर वाली बुआ के बेटे के साले का साढ़ू आपकी प्रोफाइल की ओर बढ़ा आ रहा है. इस ऐप में ऐसे तमाम दूर-पास के रिश्तेदारों को खुद ही ब्लॉक करने का फीचर होना चाहिए.

3. विद्यार्थियों के लिए उपयोगी ऐप: इस ऐप में कोर्स की चीजें न होकर ऐसे फीचर होने चाहिए जो मां-बाप की कमरे में मौजूदगी डिटेक्ट कर तमाम सोशल नेट्वर्किंग साइट्स बंद कर तुरंत किसी भारी-भरकम फिजिक्स या केमेस्ट्री से जुड़े वेबपेज पर पहुंचा दे. मोबाइल से ज्यादा ये एप्लीकेशन डेस्कटॉप पर इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि मां-बाप की आंख में पढाई के वक्त धूल झोंकते समय बच्चे दूसरी टैब पर पढ़ाई से जुड़ा कंटेंट खोलना भूल जाते हैं.

4. फेक प्रोफाइल पहचानने वाला ऐप: ये ऐप किसी भी नई प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट आने पर उसके असली या नकली होने की संभावना बता सकता हो.

5. पान फाइंडर: ये एप्लीकेशन पाथ फाइंडर की तरह काम कर सके. हालांकि गूगल मैप जैसे कई एप्स अब भी चल रहे हैं पर यह ऐप नजदीकी पान की दुकान का पता बताएगा क्योंकि हिंदुस्तान में बाकी रास्तों की सटीक जानकारी तो बस 'देशी गूगल मैप -पानवाले भैया' ही बता सकते हैं.

6. ऑटो लाइकर: यह एप्लीकेशन फेसबुक प्रयोग करने वालों के लिए होगा. इसे इनस्टॉल करते ही ये स्वत: न्यूज फीड पर आने वाली बतखमुखी सेल्फीज और 'eating गलौटी कबाब' सरीखी महत्वपूर्ण पोस्ट्स को लाइक कर देगा. इसमें ये पेड फीचर्स भी होने चाहिए कि उन अपडेट्स पर खुद ही 'Nyc click' 'cute pic' सरीखे कमेन्ट कर दे. साथ ही दो-चार ठेंगे और आंखे चमकाने वाली स्माइलीज भी धर दे.

7. और सुनाओ? ऐप : यह एप्लीकेशन रात-रात भर जागकर गुटर-गूं करने वाले नए-नवेले प्रेमी युगलों के लिए होगा. इसमें हर साढ़े तीन मिनट में दो बार 'और सुनाओ?' पूछने का सिस्टम होना चाहिए. क्योंकि आधी रात तक चलने वाले प्रेमालाप में आधे वक्त तो यही बात कही जाती है. दिन में बाकी के समय हर दो घन्टे में 'उठ गया मेरा बाबू?' , 'चाय पी तुमने' , 'खाना खाया?' , 'अभी मम्मी है यहां पर बाद में बात करते हैं शोना!' जैसे मैसेज खुद ही भेजने का फंक्शन हो.

8. पासवर्ड रिमाइंडर: दस एकाउंट्स,पन्द्रह डिवाइस और दर्जन भर एटीएम के पासवर्ड याद दिलाने को पासवर्ड से सुरक्षित किया गया एक एप्लीकेशन और होना चाहिए.

9. मूड डिटेक्टर: बीवी और बॉस के गुस्से,गर्लफ्रेंड की शॉपिंग,घरवालों के लेक्चर देने और क्लास रूम में टीचर के कमरतोड़ होमवर्क देने वाले मूड का पता लगाने और उनसे बच निकलने को बहाने तलाशने के लिए ये ऐप काम में लिया जा सकता है. बशर्ते सामने वाले ने खुद भी ये ऐप इन्स्टाल न कर रखा हो.

10. एप्स मैनेजर: पांच सौ बारह तरह के एप्लीकेशन्स रखने पर किसका क्या काम है और किसे कैसे इस्तेमाल करना है, ये बताने को भी तो एक ऐप होना चाहिए.

(युवा व्यंग्यकार आशीष मिश्र पेशे से इंजीनियर हैं और इंदौर में रहते हैं.)

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