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व्यंग्य: लालू बनेंगे सोनिया के राजनीतिक सलाहकार

लालू प्रसाद यादव सोनिया गांधी के मुख्य राजनीतिक सलाहकार बनने जा रहे हैं.

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लालू यादव, सोनिया गांधी लालू यादव, सोनिया गांधी

महज औपचारिक घोषणा होनी बाकी है. लालू यादव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के मुख्य राजनीतिक सलाहकार बनने जा रहे हैं. इसका मतलब ये नहीं कि वो अहमद पटेल की जगह लेंगे. इसके साथ ही आप के बागी नेताओं से भी बातचीत चल रही है - और उनके जल्द ही कांग्रेस ज्वाइन करने की संभावना जताई गई है.

ये सब हुआ कैसे?
सबसे बड़ा सवाल तो यही है ? लालू यादव अचानक इतने करीब कैसे हो गए? दरअसल, लालू यादव ही वो पहले नेता थे जिन्होंने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर खुल कर बचाव किया. बाद के दिनों में भी उन्हें कांग्रेस प्रवक्ताओं से भी कहीं आगे बढ़ कर सोनिया-राहुल की वकालत करते देखा गया. लालू की इन्हीं बातों ने सोनिया और राहुल के मन में लालू के प्रति एक सॉफ्ट कॉर्नर बनाया और बात यहां तक पहुंच गई. वैसे भी, राहुल गांधी एक्सपर्ट सलाह आउटसोर्स करने के पक्षधर रहे हैं. साथ ही, कांग्रेस की बड़ी समस्या ये भी थी कि राष्ट्रपति बन जाने के बाद प्रणब मुखर्जी की राय न के बराबर मिल पाती है. ऐसे में उस जगह को भरने के लिए कांग्रेस को ऐसे ही एक नेता की तलाश थी. इस पैमाने में लालू यादव ने खुद को फिट कर लिया - और बात बन गई.

क्या बदालव होंगे कांग्रेस में?
भरोसेमंद सूत्रों की माने तो कांग्रेस का पूरा कायाकल्प होने जा रहा है. फिलहाल कांग्रेस के अंदर और बाहर जो कुछ भी हो रहा है वो लालू की सलाह पर राहुल की मर्जी से हो रहा है. बताते हैं कि लालू की ही सलाह पर बजट सत्र के ऐन पहले राहुल ने लंबी छुट्टी पर बिहार जाने का फैसला किया. लालू के ही कहने पर सोनिया गांधी कांग्रेस नेताओं के साथ मनमोहन सिंह के घर तक - और फिर विपक्षी नेताओं के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च करते हुए पहुंचीं. इसके साथ ही पार्टी में कई और बदलाव होने जा रहे हैं -

राजनीतिक सलाहकार परिषद
जिस तरह सत्ता में रहते राष्ट्रीय सलाहकार परिषद काम करती थी, बदले हालात में राजनीतिक सलाहकार परिषद की भी तकरीबन वही भूमिका होगी. खास बात ये है कि इसमें पार्टीलाइन से परहेज जैसी कोई बात नहीं होगी. यानी दूसरे दलों के नेता भी इसके सदस्य हो सकते हैं, बशर्ते वे खुद तैयार हों और उनके दलों को एतराज न हो. इसमें हर सदस्य को प्रोफेशनल पारितोषिक दिए जाने की व्यवस्था होगी. राजनीतिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन के लिए योगेंद्र यादव राहुल गांधी की पहली पसंद बताए जा रहे हैं. इसको लेकर लालू यादव और योगेंद्र यादव के बीच कई मुलाकातें हो चुकी हैं. कहा तो यहां तक जा रहा है कि केजरीवाल से तकरार और चिट्ठीबाजी या फिर नई पार्टी बनाने की बात तो ऊपरी तौर पर नजर आ रहा है. ये सबकुछ एक खास रणनीति के तहत हो रहा है, जिस पर होम वर्क काफी पहले हो चुका है और इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ लालू का दिमाग है.

आंतरिक लोकपाल
अब कांग्रेस में भी एक आंतरिक लोकपाल होगा ताकि लोगों को मैसेज दिया जा सके कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी के इरादे क्या हैं? हालांकि, इसका नए सिरे से गठन नहीं होगा बल्कि स्क्रीनिंग कमेटी ही अब एक मॉनिटरिंग बॉडी की तरह काम करेगी. लालू ने इसके लिए भी योगेंद्र यादव के जरिए एडमिरल रामदास से संपर्क किया है. बताते हैं कि रामदास भी तैयार हैं लेकिन उनकी कुछ शर्तें हैं.

मीडिया मैनेजमेंट कमेटी
कांग्रेस ने, लालू की सलाह पर, एक मजबूत मीडिया मैनेजमेंट कमेटी बनाने का फैसला किया है. इसीलिए इसकी जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को दी जाएगी. इस काम में अजय माकन अपनी टीम के साथ प्रियंका को असिस्ट करेंगे. हाईटेक मोदी सरकार से मुकाबले के लिए अब कांग्रेस नेताओं के भी ट्विटर अकाउंट बनेंगे और सोशल मीडिया पर भागीदारी बढ़ाई जाएगी.

मुमकिन है...
असंभव और विचित्र किंतु सत्य जैसी बातें भी हकीकत के रूप में देखी जा सकती हैं. चर्चा है कि गिरिराज सिंह और कुमार विश्वास भी अपने अपने दलों में घुटन महसूस करने लगे हैं. लालू यादव कांग्रेस नेतृत्व को समझा चुके हैं कि राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन तो होता नहीं, बस मौके की बात होती है. कहते हैं लालू इस बात के लिए राजी कर लिया है कि ये दोनों अगर बाकायदा माफी मांग लेते हैं तो इन्हें कांग्रेस में सेट किया जा सकता है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि मनीष सिसोदिया के मना कर देने के बावजूद लालू उन्हें आम आदमी पार्टी से तोड़ने के लिए प्रयासरत हैं. मनीष के स्कूली दोस्त कुमार विश्वास को कांग्रेस में लाने के पीछे भी लालू की खास रणनीति बताई जा रही है.

कौन किसकी जगह ले सकता है?
राहुल गांधी फिलहाल तो कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनने जा रहे. लालू की सलाह पर एक बीच का रास्ता निकाला गया है. इसके तहत पार्टी संविधान में संशोधन कर फैसले के सारे अधिकार उपाध्यक्ष को दे दिए जाएंगे ताकि दो पॉवर सेंटर को लेकर कार्यकर्ता कन्फयूज न हों. हालांकि, अध्यक्ष के पास किसी भी वक्त वीटो का अधिकार होगा. नई व्यवस्था में पटेल के मुकाबले लालू की सलाह को ज्यादा तरजीह दी जाएगी. अगर आपके बागियों की टीम सलाहकार परिषद में आने को तैयार हो जाती है तो तमाम सीनियर नेता हाशिये पर जा सकते हैं. योगेंद्र यादव के आने पर एके एंटनी जैसे नेताओं की कोई खास भूमिका नहीं रह पाएगी, जबकि प्रशांत भूषण के आ जाने पर कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी और मनीष तिवारी जैसे नेताओं का रोल अपनेआप कम हो जाएगा. उसी तरह एडमिरल रामदास के होने पर जयराम रमेश को भी अपनी भूमिका फिर से तलाशनी होगी.

फिलहाल कांग्रेस की सबसे बड़ी मजबूरी ये है कि उसे दिग्विजय सिंह का रिप्लेसमेंट नहीं मिल पा रहा है. इस मामले में लालू ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. लालू का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वो अन्ना को भी कांग्रेस के पक्ष में राजी कर सकते हैं, लेकिन दिग्विजय को लेकर उनका भी दिमाग नहीं चल रहा.

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