scorecardresearch
 

संजीव चतुर्वेदी ने चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को ईमानदारी साबित करने की दी चुनौती

अशोक लवासा से संजीव चतुर्वेदी ने पूछा है कि साल 2006 से 2009 के बीच हरियाणा में बतौर बिजली विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहते हुए क्या विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई की? क्या जनहित के किसी मुद्दे पर सरकार के खिलाफ उनका टकराव हुआ?

इस अधिकारी ने लवासा को ईमानदारी साबित करने की दी चुनौती इस अधिकारी ने लवासा को ईमानदारी साबित करने की दी चुनौती

  • संजीव चतुर्वेदी फिलहाल उत्तराखंड सरकार में वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक हैं
  • चिट्ठी में संजीव चतुर्वेदी ने अशोक लवासा की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए हैं

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को लेकर अलग अलग राय बन रही है. कई सरकारी एजेंसियां उनके और उनके परिवार के खिलाफ जांच कर रही हैं तो कुछ लोग उन्हें सरकार के खिलाफ हिम्मत दिखाने वाले अधिकारियों की मिसाल बता रहे हैं. उन्हीं चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को मैग्सेसे विजेता, पूर्व व्हिसल ब्लोअर और घोटाले का पर्दाफाश करने वाले आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने खुली चिट्ठी लिखी है और लवासा के ईमानदारी के दावों पर सवाल खड़े किए हैं. संजीव चतुर्वेदी फिलहाल उत्तराखंड सरकार में वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक के पद पर नियुक्त हैं.

लवासा को भेजी गई चिट्ठी में संजीव चतुर्वेदी ने उनकी कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए हैं. अशोक लवासा से संजीव चतुर्वेदी ने पूछा है कि साल 2006 से 2009 के बीच हरियाणा में बतौर बिजली विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहते हुए क्या विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई की? क्या जनहित के किसी मुद्दे पर सरकार के खिलाफ उनका टकराव हुआ? उसी दौरान हुड्डा सरकार में हुए माइनिंग और वन विभाग के घोटालों को लेकर केंद्र सरकार की जांच में मुख्यमंत्री को दोषी पाया गया और सीबीआई जांच की सिफारिश की गई.

अशोक लवासा खबरों में तब आए थे जब उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना मत दिया था. अशोक लवासा ने हाल ही में एक आर्टिकल के जरिए लिखा था कि ईमानदार अधिकारियों की प्रताड़ना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. जिस पर सवाल उठाते हुए चतुर्वेदी ने लवासा को खुला खत लिखा है कि उन्होंने ऐसे विचार बतौर चुनाव आयुक्त नहीं लिखा है बल्कि उनकी अपनी निजी राय है. संजीव चतुर्वेदी ने चुनाव आयुक्त लवासा को 9 पन्नों की चिट्ठी लिखी है और साथ ही अपने आरोप को सही साबित करने के लिए 81 पन्नों की अदालती प्रक्रिया का दस्तावेज भी अटैच किया है.

संजीव चतुर्वेदी वही अधिकारी हैं जिन्होंने एम्स में घोटाले का पर्दाफाश किया था और जिनकी नियुक्ति और दिल्ली सरकार में ट्रांसफर को लेकर चतुर्वेदी और प्रधानमंत्री कार्यालय आमने-सामने आ गए थे.

चतुर्वेदी ने यहां तक पूछा कि पब्लिक में ऐसा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है जिससे यह पता चले कि अशोक लवासा को किसी नेता अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का खुलासा करने या भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी बड़ी कार्रवाई करने के चलते सरकारी प्रताड़ना झेलनी पड़ी है.

संजीव चतुर्वेदी ने अशोक लवासा पर आरोप लगाते हुए यह भी लिखा है कि बतौर पर्यावरण सचिव रहते हुए उन्होंने चतुर्वेदी के दिल्ली सरकार में ट्रांसफर की फाइल को न सिर्फ दबाए रखा बल्कि पूरी कोशिश की जिससे संजीव चतुर्वेदी केजरीवाल सरकार के साथ काम न कर पाएं.

चतुर्वेदी ने लवासा पर अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने और यहां तक कि उनके मामलों में सीधे प्रधानमंत्री के शक्तियों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है. चतुर्वेदी ने लिखा है कि फरवरी और अप्रैल 2016 में अपने कैबिनेट कमेटी ऑफ अपॉइंटमेंट के अधिकारों को नकारते हुए खुद ही फैसला लिया जिसे बाद में अदालत ने खारिज किया.

अशोक लवासा को लिखी गई खुली चिट्ठी में एम्स के पूर्व व्हिसल ब्लोअर ने यहां तक लिखा है कि आप के गैरकानूनी फैसलों की वजह से एक ईमानदार अधिकारी को न सिर्फ अदालतों के चक्कर लगाने पड़े बल्कि उस पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें