महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इंडिया टुडे सफाईगीरी अवॉर्ड्स कार्यक्रम में वायु प्रदूषण को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इस दौरान प्रदूषण कम करने की दिशा में बेहतर काम करने वाले शहर को सम्मानित भी किया गया. इंडिया टुडे की तरफ से इस साल यह अवॉर्ड गुजरात के सूरत शहर को दिया गया.
इस मौके पर कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सूरत के मेयर जगदीश पटेल ने अपने शहर के बारे में तमाम बातें साझा कीं और बताया कि किस तरह उनके शहर की छवि बदली गई. जगदीश पटेल ने बताया कि 1994 में प्लेग बीमारी ने पूरे शहर को बदनाम कर दिया. हालात ये हो गए कि पूरे शहर से लोग बाहर जा रहे थे. हाईवे पर कहीं कोई गाड़ी होटल पर रुकती थी और लोग सूरत की नंबर प्लेट देखते थे तो उन्हें पानी भी नहीं दिया जाता था. यहां तक कि रिश्तेदार भी गलत नजर से देखते थे.
कैसे आया बदलाव?
मेयर जगदीश पटेल ने बताया कि यह समस्या इतनी बड़ी हो गई थी कि पूरे शहर को शर्मिंदा होना पड़ता था. लिहाजा, इसके बाद कोशिशें की गईं. सूरत में डोर-टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था शुरू की गई. कूड़े के ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए. आज स्थिति ये है कि लगभग पूरा कूड़ा ट्रीट कर लिया जाता है, यही वजह है कि सूरत शहर गंदगी से मुक्त हो गया है और लोग साफ हवा में सांस ले रहे हैं.