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सबरीमाला मंदिर में धरे रह गए सुरक्षा इंतजाम, झड़प में एक महिला जख्मी

सबरीमाला मंदिर में मंगलवार सुबह झड़प हो गई. इसमें एक 52 साल की महिला जख्मी हो गई, जबकि कुछ मीडियाकर्मी भी घायल हो गए.

सबरीमाला मंदिर. फोटो रॉयटर्स सबरीमाला मंदिर. फोटो रॉयटर्स

सबरीमाला मंदिर पर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही वहां सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई है.  मंगलवार तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद वहां झड़प हो गई. इसमें एक 52 साल की महिला घायल हो गई. इसके अलावा कुछ मीडियाकर्मियों के भी जख्मी होने की खबर है.

मंदिर सोमवार शाम पांच बजे खोला गया था. मंदिर खुलने के कुछ दिन पहले से ही वहां सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए थे. 2300 जवानों को मंदिर में तैनात किया गया है.  इसके बावजूद आज झड़प हो गई. थ्रिसुर की रहने वाली 52 वर्षीय महिला ललिथा का लोगों ने विरोध किया. इस दौरान महिला घायल हो गई.

अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच दो दिवसीय विशेष पूजा के लिए तीन हफ्ते में दूसरी बार भगवान अयप्पा मंदिर के दरवाजे सोमवार को यहां खोले गए थे. पहले ही आशंका जताई गई थी कि मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश का विरोध करने वाले यहां प्रदर्शन कर सकते हैं.

हालांकि, पुलिस ने कहा कि मंदिर में 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की कोई लड़की या महिला नजर नहीं आई, लेकिन 30 साल की एक महिला अपने पति और दो बच्चों के साथ पम्बा स्थित आधार शिविर पहुंची है.

बहरहाल, अलप्पुझा जिले के चेरथला की रहने वाली अंजू नाम की इस महिला ने पुलिस को बताया कि वह मंदिर नहीं आना चाह रही थी लेकिन अपने पति अभिलाष के दबाव में वह पम्बा आई.

पुलिस ने दावा किया कि महिला के पति की जिद है कि उसे अपने परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने दी जाए.

इस मुद्दे पर केरल पुलिस विरोधाभासी बयान देती दिख रही है. एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि महिला ने पुलिस सुरक्षा की मांग की थी जबकि पुलिस अधीक्षक राहुल आर नायर का कहना है कि महिला ने कोई सुरक्षा नहीं मांगी.

जब महिला का पति अपने रुख पर कायम रहा तो पुलिस ने अंतिम निर्णय के लिए उसके रिश्तेदारों को पम्बा आने को कहा. रात 10 बजे मंदिर के द्वार बंद होने के समय अंजू और उसका परिवार पुलिस नियंत्रण कक्ष में इंतजार कर रहे थे.

पम्बा वह स्थान है जहां से श्रद्धालु पर्वत चोटी पर स्थित सबरीमला मंदिर तक पांच किलोमीटर तक पैदल जाते हैं. मंगलवार को त्रावणकोर के आखिरी राजा चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा के जन्मदिवस के अवसर पर मंगलवार को विशेष पूजा ‘श्री चित्रा अत्ता तिरूनाल’ होगी. इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने के नाम पर श्रद्धालुओं को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकने की सदियों पुरानी परंपरा को गलत बताते हुए उसे खत्म कर दिया था और सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 17 अक्टूबर को पहली बार कपाट खुले थे और अब खुल रहे हैं.

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