भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के मकसद से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) बड़े प्लान पर काम कर रहा है. इसी सिलसिले में संस्था की ओर से 27 जुलाई को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के नई दिल्ली स्थित ऑडिटोरियम में एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है.
जिसमें मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की मौजूदगी में देश भर के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के करीब दो सौ कुलपति और शिक्षाविद हिस्सा लेंगे. शिक्षण मंडल ने देश भर के विश्वविद्यालयों से लेकर शोध संस्थानों के प्रमुखों को सम्मेलन में हिस्सा लेकर नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में सुधार को लेकर सुझाव देने की अपील की है.
बीएसएम का कहना है कि हाल ही में मोदी सरकार की ओर से तैयार नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार करने में उससे जुड़े शिक्षाविदों ने अहम भूमिका निभाई है. ऐसे में संस्था की कोशिश है कि यह ड्राफ्ट जब मूर्त रूप ले तो इसमें किसी तरह की खामी न हो.
जेएनयू-यूजीसी सहित कई संस्थान आए साथ
भारतीय शिक्षण मंडल की ओर से नई शिक्षा नीति पर सुझाव लेने के लिए आयोजित कांफ्रेंस के कई सरकारी संस्थान पार्टनर बने हैं. इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय जेएनयू, देश भर के विश्वविद्यालयों को दिशा-निर्देशित करने वाली संस्था यूजीसी, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ( ICSSR), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ( एआईसीटीई), इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ( IGNOU), सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI), एसोशिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज ( AIU) जैसे संस्थान शामिल हैं. भारतीय शिक्षण मंडल का मानना है कि जिन एजुकेशन रेगुलेटरीज के कंधों पर नई शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने का जिम्मा है, बगैर उनके सहयोग के अहम सुझावों को शामिल किए बगैर शिक्षा नीति कारगर नहीं हो सकती.
बौद्धिक बहस से आएंगे नए सुझाव
भारतीय शिक्षण मंडल का कहना है कि कांफ्रेंस का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शैक्षिक नीति के ड्राफ्ट को और दुरुस्त करने के साथ इसे लागू करने के लिए जरूरी रोडमैप पर विचार-विमर्श करना है. मानव संसाधन विकास मंत्री के साथ शिक्षा नियामक संस्थानों, शिक्षाविदों और कुलपतियों के एक छत के नीचे उपस्थित होने से ही इस बैठक की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस कांफ्रेंस के जरिए देश भर के अकादमिक नेतृत्व को एक प्लेटफॉर्म देकर बौद्धिक बहस के जरिए नई शिक्षा नीति को लागू करने पर जोर देना है.
भारतीय शिक्षण मंडल के अध्यक्ष सच्चिदानंद जोशी कहते हैं," हम बौद्धिक बहसों में विश्वास करते हैं. वैदिक काल से शास्त्रार्थ की परंपरा रही है. इससे समकालीन समस्याओं के समाधान की दृष्टि प्राप्त होती है. भारत को फिर से विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने के लिए वैदिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अकादमिक नेतृत्व का सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा."
संस्था के संगठन मंत्री मुकुल कनिटकर केंद्र सरकार की ओर तैयार नई शिक्षा नीति ड्राफ्ट की सराहना करते हैं. उनका कहना है कि अभी बौद्धिक बहसों के जरिए इसमें और सुधार की जरूरत है. भारतीय शिक्षण मंडल ने शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए 50 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने बताया कि बहस के दौरान तमाम सुझाव आएंगे, जिससे नई शिक्षा नीति को बेहतर किया जा सकेगा.
एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे कहते हैं कि नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट पर पूरे देश में बहस चल रही है. संस्था के ऑडिटोरियम में आयोजित कांफ्रेंस में कुलपतियों की मौजूदगी अहम है, क्योंकि शिक्षा नीति को लागू करने में उनकी अहम भूमिका होती है. कांफ्रेंस में मंथन होगा, ग्रुप डिस्कशन्स होंगे. क्लासिफिकेशन, फंडिंग ऑफ रिसर्च, ऑटोनामी इन गवर्नेंस, ऑवर लैंग्वेजेज-ऑवर थॉट, जनरेशन ऑफ फंड्स, डिग्निटी ऑफ क्वालिफिकेशन्स, करिकुलम में लचीलापन, क्रिएटिविटी इन एजूकेशन आदि बिंदुओं पर चर्चा होगी.
बता दें कि 1969 में स्थापना के बाद से बीएसएम राष्ट्रीय शिक्षा नीति को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है. यह संस्था भारतीय ज्ञान प्रणाली की नींव पर आधारित शिक्षा नीति की वकालत करती है.