सीबीआई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक आदेश को आज उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है.
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई कंप्यूटर ग्राफिक्स शिक्षक रिजवानुर रहमान की मौत के मामले में हत्या का मामला दर्ज करे और जांच नए सिरे से एक बार फिर शुरू करे. रिजवानुर का शव रेल की पटरियों के पास पड़ा मिला था.
एजेंसी का कहना है कि नए सिरे से जांच की जरूरत नहीं है क्योंकि वह पहले ही विस्तृत जांच कर चुकी है और जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि अशोक तोदी और उनके परिजनों के खिलाफ रिजवानुर को आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध बनता है.
उच्च न्यायालय ने 18 मई को दिए अपने फैसले में कहा था कि सीबीआई इस मामले की नए सिरे से जांच करे. एजेंसी ने इसके खिलाफ अपील दायर की है. अशोक तोदी ने 28 मई को कलकत्ता उच्च न्यायालय के इस फैसले को न्यायालय में चुनौती दी थी. अदालत की खंडपीठ ने 18 मई को अपने फैसले में कहा था कि रिजवानुर के भाई रुकबानुर रहमान ने 21 सितंबर, 2007 को जो शिकायत दर्ज कराई है, सीबीआई उसे प्राथमिकी के तौर पर ले.
खंडपीठ ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि न्यायमूर्ति सौमित्र पॉल ने अपने पुराने आदेश में सीबीआई को सिर्फ मौत के कारणों की जांच के आदेश देते हुए इस मामले में रिपोर्ट जमा करने को कहा था, और एजेंसी को इस कथित अपराध की जांच के लिए अधिकृत नहीं किया था.
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला था कि रिजवानुर की मौत आत्महत्या थी. एजेंसी ने अनुशंसा की थी कि दंड संहिता की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसावे का मामला चलाया जाए.
रिजवानुर का शव 21 सितंबर, 2007 को दमदम इलाके में रेल पटरियों के पास मिला था. इसके एक महीने पहले, 18 अगस्त, 2007 को उसने तोदी की बेटी प्रियंका से शादी की थी.
इस मामले में 200 करोड़ रुपये के लक्स कोजी ब्रांड का मालिक अशोक तोदी, उसका भाई प्रदीप और बहनोई अनिल सरोगी आरोपी हैं.