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भारत में धर्म एक बड़ा कारोबार: अध्ययन

ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय की ओर से किये गये अध्ययन में कहा गया है कि भारत में धार्मिक संगठन न सिर्फ व्यवसायिक संगठनों की तरह काम करते हैं, बल्कि लोगों की निष्ठा बरकरार रखने के लिए अपनी गतिविधियों में विविधता भी लाते रहते हैं.

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ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय की ओर से किये गये अध्ययन में कहा गया है कि भारत में धार्मिक संगठन न सिर्फ व्यवसायिक संगठनों की तरह काम करते हैं, बल्कि लोगों की निष्ठा बरकरार रखने के लिए अपनी गतिविधियों में विविधता भी लाते रहते हैं.

यह अध्ययन भारतीय मूल की शिक्षाविद श्रेया अय्यर की अगुवाई में किया गया है. भारत के धार्मिक संगठनों से जुड़े इस अध्ययन के नतीजों का विवरण ‘रिसर्च होराइजंस’ के ताजा संस्करण में प्रकाशित किया गया है. अर्थशास्त्र विभाग के एक दल ने दो वर्षों तक हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख और जैन समुदाय के 568 संगठनों पर अध्ययन किया. इसमें भारत के सात राज्यों के धार्मिक संगठनों की धार्मिक और गैरधार्मिक गतिविधियों पर अध्ययन किया गया.

अध्ययन के बारे में डॉक्टर अय्यर कहती हैं, ‘हमने पाया कि धार्मिक संगठनों के कामकाज में उस तरह का लचीलापन होता है, जैसा कारोबारी कंपनियों में होता है.’ उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से कारोबारी संगठन बाजार में अपने प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने की कोशिश करते हैं, उसी तरह धार्मिक संगठन भी स्पर्धा में आगे निकलने के लिए अपने आसपास के राजनीतिक, आर्थिक और अन्य तरह के माहौल को बदलते हैं.’ {mospagebreak}

अध्ययन के मुताबिक भारतीय धार्मिक संगठन रक्तदान, नेत्र शिविर, चिकित्सा सेवा शिविर और गरीबों के लिए सामूहिक विवाह जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं ताकि अपने से जुड़े लोगों की निष्ठा को बरकरार रख सकें और अन्य लोगों को अपनी ओर खींच सकें.

इस अध्ययन में कहा गया है कि विचारधारा के मामले पर धार्मिक संगठन उसी तरह का रुख अपनाते हैं जैसे कारोबारी संगठन अपनी बिक्री बढ़ाने की कोशिश के लिए नीतियां अपनाते हैं. यह अध्ययन महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात स्थित धार्मिक संगठनों पर किया गया. इसमें 272 हिंदू संगठन, 248 मुस्लिम संगठन, 25 ईसाई संगठन और 23 सिखं एवं जैन संगठन शामिल थे.

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