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भारत के सपूत की जिंदगी खतरे में थी, तब इंटरनेशनल कोर्ट पहुंचा भारतः विदेश मंत्रालय

बागले ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत के आदेश के खिलाफ जाधव के परिवार की अपील की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले

भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर इंटरनेशनल कोर्ट (आईसीजे) जाने पर विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि यह फैसला सावधानी पूर्वक विचार करके लिया गया. मंत्रालय ने कहा कि जाधव को अवैध रूप से पाकिस्तान में हिरासत में रखा गया था, जहां उनका जीवन खतरे में था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, 'यह फैसला सावधानीपूर्वक विचार विमर्श करके लिया गया था.' कुलभूषण जाधव के मुद्दे पर आईसीजे में जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने उच्चायोग संपर्क (काउंसलर एक्सेस) के लिए 16 बार अनुरोध किया, लेकिन इसे इंकार कर दिया गया. हमने मौखिक और लिखित में कई बार जाधव मामले में चलाई गई प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से इस मामले के दस्तावेजों से जुड़ी हमारी मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई.

उन्होंने कहा कि जाधव के परिवार की ओर से जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा जाधव को सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ अपील की स्थिति के बारे में भी कोई सूचना नहीं दी गई. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एक सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें पूछा गया था कि भारत इस मामले में इंटरनेशनल कोर्ट में क्यों गया?

विदेशमंत्री ने सरताज अजीज को लिखा पत्र
बागले ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत के आदेश के खिलाफ जाधव के परिवार की अपील की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि जाधव मामले में भारत ने सावधानीपूर्वक चर्चा के बाद आईसीजे जाने का फैसला किया. क्योंकि वह अवैध रूप से पाकिस्तानी हिरासत में है और भारत के एक सपूत की जिंदगी खतरे में थी जिन्हें अपहृत कर वहां लाया गया है. उन्हें निष्पक्ष जांच का मौका भी नहीं दिया जा रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री सुषमा ने 27 अप्रैल को पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को एक खत लिखकर अनुरोध किया था कि जाधव के परिवार को वीजा दिया जाए, लेकिन उनके परिवार को अभी तक वीजा नहीं दिया गया.

शरीफ ने पाक सेना प्रमुख के साथ की चर्चा
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर रोक लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) के आदेश पर चर्चा की. समाचार चैनल जियो न्यूज के अनुसार दोनों की मुलाकात करीब 90 मिनट तक चली और इस दौरान शरीफ ने जाधव के मामले के संदर्भ में ताजा हालात पर जानकारी दी.

जाधव (46) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत द्वारा पिछले महीने मौत की सजा सुनाई गई थी. भारत ने आईसीजे में अपनी अपील में कहा कि पाकिस्तान ने राजनयिक संबंधों पर वियना संधि का घोर उल्लंघन किया है. भारत ने कहा कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था, जहां वह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत होने के बाद व्यापार कर रहा था, लेकिन पाकिस्तान ने उसे तीन मार्च 2016 को बलूचिस्तान से गिरफ्तार करने का दावा किया. चैनल के अनुसार शरीफ और बाजवा ने डॉन लीक विवाद और पाक-अफगान संबंधों पर भी चर्चा की.

जाधव मामले में ICJ के अधिकार क्षेत्र का विश्लेषण
पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि वह भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर रोक लगाने के संदर्भ में इंटरनेशनल जस्टिस कोर्ट (आईसीजे) के अधिकार क्षेत्र का विश्लेषण कर रहा है. प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा कि पाकिस्तान अगले कुछ दिनों में बयान जारी करेगा.

अजीज ने कहा, 'हम भारतीय याचिका और इस मामले में आईसीजे के अधिकार क्षेत्र का विश्लेषण कर रहे हैं. इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत अपने नागरिक कुलभूषण जाधव को सुनाई गई मौत की सजा का इस्तेमाल देश में अपने राज्य प्रायोजित आतंकवाद से ध्यान हटाने के लिए कर रहा है.'

आसिफ ने ट्वीट कर कहा, 'आईसीजे में भारत की अपील पाकिस्तान में उसके राज्य प्रायोजित आंतकवाद से ध्यान हटाने की कोशिश है. कुलभूषण को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराया गया.'

हेग स्थित आईसीजे के आदेश के बाद पाकिस्तान की ओर से यह पहली प्रतिक्रिया थी. भारत ने पिछले महीने पाकिस्तान की सैन्य अदालत से जाधव को दी गई फांसी की सजा के खिलाफ आईसीजे का रूख किया था.

ICJ के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता PAK: पाकिस्तानी मीडिया
पाकिस्तानी मीडिया ने आईसीजे के आदेश पर भारत के दावे को खारिज कर दिया. जियो टीवी ने कहा कि आईसीजे के अधिकार क्षेत्र में पाकिस्तान नहीं आता, क्योंकि यह दोनों पक्षों की सहमति से ही मामले पर संज्ञान ले सकता है. डॉन की वेबसाइट ने रोक के आदेश के भारत के दावे के बारे में कोई खबर नहीं दी है. इसी तरह एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस मुद्दे पर अपनी खबर में रोक के आदेश का जिक्र नहीं किया है.

बता दें कि जाधव को पिछले महीने मौत की सजा सुनाई गई थी. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ आईसीजे का रूख करते हुए आरोप लगाया था कि पाकिस्तान ने जाधव मामले में विएना संधि का उल्लंघन किया है. जाधव की सजा पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया दी गई.

जाधव की नियोजित हत्या हुई तो भुगतने होंगे अंजाम
भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर पहले से नियोजित हत्या की गई, तो द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान होगा और पाकिस्तान को उसके परिणाम भुगतने होंगे. अपनी अर्जी में भारत ने आईसीजे को यह भी बताया कि उसे एक प्रेस विज्ञप्ति से जाधव की मौत की सजा के बारे में पता चला.

जाधव को जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के लिए मौत की सजा सुनाई गई. भारत ने यह स्वीकार किया है कि जाधव नौसेना अधिकारी रहा है, लेकिन सरकार के साथ उसके किसी भी तरह के संबंध को खारिज कर दिया. भारत ने कहा कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया. भारत ने जाधव की मां की अपील भी पाकिस्तान को सौंपी है, जिसमें उसकी सजा को पलटने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया है.

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